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भारत में 15 अगस्त को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है?

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वन्त्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन ब्रिटिश शासन से भारत को आजादी मिली थी.  15 अगस्त के दिन को सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रीय और राजपत्रित अवकाश के रूप में घोषित किया गया है. परन्तु क्या आप जानते हैं कि भारत में आखिर 15 अगस्त को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

भारत में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास

भारत की उपमहाद्वीप के सीमा चौकी पर 17वीँ शताब्दी के दौरान कुछ यूरोपियन व्यापारियों द्वारा प्रवेश किया गया था और अंतत: ब्रिटीश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को विशाल सैनिक शक्ति के कारण गुलाम बना लिया. 18वीं शताब्दी तक भारत में अंग्रेजों ने अपना आदिपत्य स्थापित कर लिया था. देखा जाए तो 1857 में ही अंग्रेजों के खिलाफ भारत में स्वतंत्रता क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी. इस विद्रोह को सिपाहीयों का विद्रोह, 1857 का विद्रोह इत्यादि कहा जाता है. इस विद्रोह के द्वारा (1858 का अधिनियम भारत सरकार), भारत को नियंत्रण मुक्त करने का एहसास ब्रिटीश राज को भारतीय स्वतंत्रता सेनानीयों ने दिलाया था.

भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस अधिवेशन 1929 लाहौर में हुआ था जहां पर भारत ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी. 1930 से 1947 के बीच कई आंदोलन हुए जिनमें से एक है सविनय अवज्ञा आंदोलन जिसे गांधी जी ने 1930 में शुरू किया था जिसका अर्थ है बिना हिंसा के किसी भी सरकारी आदेश की अवहेलना करना.

हम आपको बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1947 में ब्रिटिश सरकार आश्वस्त हो चुकी थी कि वो अब लंबे समय तक भारत को अपनी शक्ति नहीं दिखा सकेगी. भारत के स्वतंत्रता सेनानी लगातार अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश कर रहे थे और स्वतंत्रता की लड़ाई को डट के लड़े. इसलिए भारत को मुक्त करने का फैसला आखिरकार अंग्रेजों ने ले लिया था.

आखिर 15 अगस्त को भारत में स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है?

Source: www.spandanfeatures.com

जानें पहली बार अंग्रेज कब और क्यों भारत आये थे

दरअसल, भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को ब्रिटिश संसद ने 30 जून 1948 तक भारत में सत्ता-हस्तांतरण का दायित्व सौंपा था. सी राजगोपालचारी के अनुसार अगर माउंटबेटन ने 30 जून 1948 तक इंतजार किया होता तो उनके पास हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचती. इसलिए माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में ही ये दायित्व पूरा कर दिया था.

ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में माउंटबेटन की भेजी गई सूचनाओं के आधार पर इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया था. इस विधेयक को ब्रिटिश संसद ने तुरंत पारित कर दिया और इसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत में ब्रिटिश राज समाप्त होना तय हुआ. हालाकि भारत की आजादी के बाद हिन्दू-मुस्लिम दंगों के कारण भारत ओर पाकिस्तान अलग होकर दो स्वतंत्र-उपनिवेश बने जिन्होंने ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के तहत रहना स्वीकार किया. मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल बने जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरु आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री. दिल्ली, देश की राजधानी में इस दिन समारोह रखा गया जहां नेता, स्वतंत्रता सेनानियों इत्यादि ने भाग लिया और आजादी का जश्न मनाया.

क्या आप जानते हैं की जब भारत आजाद हुआ था तब भारत की 500 से ज्यादा रियासतों का भविष्य भी नए देशों पर छोड़ दिया गया था. इन रियासतों को भारत और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनना था. कई रियासतें 15 अगस्त 1947 से पहले भारत या पकिस्तान का हिस्सा बन गई और कई आजादी के बाद भी किसी भी देश में शामिल नहीं हुई.

भारत में स्वतंत्रता दिवस का क्या महत्व है और इसका क्या प्रतीक है?

इस दिन भारत में पतंग उड़ाई जाती हैं और ये खेल स्वतंत्रता दिवस का प्रतीक है और दूसरा प्रतीक स्वतंत्रता दिवस का दिल्ली का लाल किला है जहां हर साल इस दिन भारत के प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं. 15 अगस्त को भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त हुई थी जिसकी याद में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. हर साल पूरे उत्साह के साथ ये दिन मनाया जाता है.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारत के गणराज्य ने 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के शासन से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की. तब से, 15 अगस्त को  ब्रिटिश सरकार से आजादी मिलने के उपलक्ष में भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. भारत के लिए, 15 अगस्त अपने पुनर्जन्म का दिन है, एक नई शुरुआत है.

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