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Tokyo Olympic 2020 में रूस पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?

Shikha Goyal

हर खिलाड़ी का सपना होता है अपने देश का ओलिंपिक खेलों में प्रतिनिधित्व करना. हलाकि इस बार Tokyo Olympic में रूस के खिलाड़ी तो हिस्सा लेंगे लेकिन उन्हें अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिलेगा. इस बार ओलिंपिक  में ना ही रूस का झंडा लहराएगा और ना ही फैंस को उनका राष्ट्रगान सुनने को मिलेगा. 

2020 के Tokyo Olympic में, रूस के 335 खिलाड़ी दुनिया भर के एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. फिर भी, अपने समकक्षों के विपरीत, रूसियों को अपने देश का नाम, ध्वज और राष्ट्रगान का उपयोग करने की अनुमति नहीं है, जो रूसी ओलंपिक समिति ( Russian Olympic Committee, ROC) के तहत प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं.

2020 के पदक तालिका में, उनके सभी पदक ROC नाम के आगे सूचीबद्ध हैं, एक ध्वज के साथ जो रूस के राष्ट्रिय ध्वज से अलग है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से रूस पर Tokyo Olympic से 'प्रतिबंध' लगा दिया गया है.

Tokyo Olympic 2020 से रूस पर 'प्रतिबंध' क्यों लगाया गया?

दिसंबर 2019 में, वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) ने रूस पर चार साल के लिए Tokyo Olympic और 2022 में फीफा विश्व कप सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया. 

एक डोपिंग कार्यक्रम के बारे में नए खुलासे के बाद रूस पर आरोप लगाया गया था, जिसके बाद प्रतिबंध लागू किया गया था.

WADA के अनुसार, ‘रूस पर आरोप था कि वह डोप टेस्ट के लिए अपने एथलीट्स के गलत सैंपल्स भेज रहा है. जांच में यह सही पाया गया कि रूस ने सैंपल्स से छेड़छाड़ की.’

मूल रूप से रूस पर क्या आरोप लगाया गया था?

2014 में, 800 मीटर धावक यूलिया स्टेपानोवा ( Yulia Stepanova) और उनके पति विटाली (Vitaly), रूसी एंटी डोपिंग एजेंसी (RUSADA) के एक पूर्व कर्मचारी, एक जर्मन डाक्यूमेंट्री में दिखाई दिए और बाद में खेल इतिहास में सबसे "परिष्कृत डोपिंग कार्यक्रमों" में से एक के रूप में वर्णित किया गया था. 

दो साल बाद, एक और व्हिसलब्लोअर - ग्रिगोरी रोडचेनकोव (Grigory Rodchenkov), RUSADA के एक पूर्व प्रमुख ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि रूस ने सावधानीपूर्वक नियोजित, राज्य-प्रायोजित डोपिंग योजना चलाई.

उन्होंने एक व्यापक साजिश का आरोप लगाया, जिसमें देश के एंटी डोपिंग और खुफिया सेवाओं के सदस्यों ने 2014 सोची शीतकालीन ओलिंपिक के दौरान एजेंसी की प्रयोगशाला में एथलीटों के यूरीन के सैंपल्स के साथ छेड़कानी की गई. प्रयोगशाला, जांच के अनुसार, रूस की राज्य सुरक्षा सेवाओं के सदस्यों द्वारा संरक्षित थी.

इसके बाद, अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (IOC), WADA  और अन्य वैश्विक महासंघों ने जांच की एक श्रृंखला शुरू की.

इस पर अधिकारियों की क्या प्रक्रिया थी?

2015 में आरोप सामने आने के तुरंत बाद रूस की एंटी डोपिंग प्रयोगशाला की मान्यता निलंबित कर दी गई थी.

प्रारंभिक जांच के बाद, IOC ने रियो ओलिंपिक के लिए रूस के 389 सदस्यीय दल से पूरी ट्रैक और फील्ड टीम सहित 111 एथलीटों को हटा दिया गया.

डिटेल में जांच के बाद, IOC ने दक्षिण कोरिया के Pyeongchang में 2018 शीतकालीन ओलिंपिक में रूस की भागीदारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया.

2020 में, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) ने चार साल के शुरुआती प्रतिबंध को घटाकर दो कर दिया, लेकिन यह सुनिश्चित किया कि कोई भी आधिकारिक रूसी टीम WADA हस्ताक्षरकर्ता द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में तब तक भाग नहीं ले सकती, जब तक कि 16 दिसंबर, 2022 को मंजूरी की अवधि समाप्त नहीं हो जाती.

इसका मतलब है कि आधिकारिक रूसी टीमें 2020 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक, अगले साल टोक्यो में होने वाले पैरालिंपिक और साथ ही बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक से बाहर हो गई है.

कतर में 2022 विश्व कप में भी, रूस को एक तटस्थ नाम के तहत प्रतिस्पर्धा करनी होगी, अगर वह क्वालीफाई करती है.

रूस को किसी भी विश्व खेल आयोजन की मेजबानी करने की भी अनुमति नहीं है, जिसका शासी निकाय प्रतिबंध अवधि के दौरान WADA के साथ पंजीकृत है.

अंत में आपको बता दें कि रूस के 335 एथलीट अभी भी टोक्यो में खेल रहे हैं, केवल ROC (रूसी ओलंपिक समिति) नाम के तहत. 'सजा' में उन्हें रूस का नाम, अपना राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान का उपयोग नहीं करना शामिल है.

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