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गुजरात के कच्छ में बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा पार्क, जानें इससे जुड़े महत्तव के बारे में

Arfa Javaid

15 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क का शिलान्यास किया। इसके साथ उन्होंने अलवणीकरण संयंत्र, स्वचालित दूध प्रसंस्करण और पैकेजिंग संयंत्र सहित कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी उपस्थित थे। 

हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा पार्क (Hybrid Renewable Energy Park) के बारे में

1- दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा: गुजरात के कच्छ में 30 GW का अक्षय ऊर्जा पार्क दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा पार्क है।

2- भारत सरकार का विजन: यह परियोजना वर्ष 2022 तक 175 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लिए भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

3- पीएम मोदी का विजन: वर्ष 2030 तक प्रधानमंत्री मोदी की 450  GW बिजली पैदा करने की परिकल्पना को पूरा करने में भी यह प्रमुख भूमिका निभाएगा।

4- पार्क में दो ज़ोन होंगे: ये पार्क 72, 600 हेक्टेयर भूमि पर फैला होगा। 49,600 हेक्टेयर भूमि पर हाइब्रिड पार्क ज़ोन होगा, जिसमें 24,800 मेगावाट क्षमता के पवन और सौर ऊर्जा संयंत्र होंगे; और दूसरा 23,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक विशेष पवन ऊर्जा क्षेत्र होगा।

5- परियोजना का स्थान: परियोजना स्थल खावड़ा गांव और विघकोट के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित है।

हाइब्रिड पार्क: यह अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 6 किमी की दूरी पर स्थित होगा।

विशेष पवन पार्क: यह अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 1-6 किमी की दूरी पर स्थित होगा।

6- भारत-पाक सीमा से दूरी: यह परियोजना खवाड़ा (क्षेत्र में नागरिकों द्वारा पहुँचा जाने वाला अंतिम बिंदु) से लगभग 25 किमी दूर है।

7- परियोजना का आवंटन:

हाइब्रिड पार्क क्षेत्र: (क) अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (19,000 हेक्टेयर; 9,500 मेगावाट)

(ख) सरजन रियलिटीज लिमिटेड (सुजलॉन, 9,500 हेक्टेयर; 4,750 मेगावाट)

(ग) एनटीपीसी लिमिटेड (9,500 हेक्टेयर; 4,750 मेगावाट)

(घ) गुजरात इंडस्ट्रीज पावर कंपनी लिमिटेड (4,750 हेक्टेयर; 2,375 मेगावाट)

(ड) गुजरात राज्य विद्युत निगम (6,650 हेक्टेयर; 3,325 मेगावाट)।

विशेष पवन पार्क क्षेत्र: संपूर्ण 23,000 हेक्टेयर भूमि सौर ऊर्जा निगम (SECI) को आवंटित की गई है।

8- समय: परियोजना के पूरा होने का अनुमानित समय पांच साल है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सेना या बीएसएफ से संबंधित उक्त परियोजना के आसपास कई 'नो-गो-जोन' हैं।

उक्त स्थल को परियोजना के लिए क्यों चुना गया है?

उक्त स्थल को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि:

1- खवड़ा के पास 1,00,000 हेक्टेयर भूमि बंजर है। रक्षा मंत्रालय ने अप्रैल 2020 में 72,600 हेक्टेयर भूमि के लिए मंजूरी दे दी थी।

2- बॉर्डर के पास पवन चक्कियों की स्थापना बाउंडरी का काम करेगी।

राज्य सरकार के एक आधिकारी के अनुसार, "राज्य सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा एक 18 किलोमीटर की सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह भारत पुल को बाईपास करेगा और परियोजना तक पहुंच प्रदान करेगा। इसके अलावा, मौजूदा सड़क जो इंडिया ब्रिज से विघकोट तक जाती है, को मजबूत और चौड़ा किया जा रहा है।" 

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