चीन का अंडरवाटर ड्रोन - सी विंग ग्लाइडर क्या है?

चीन के ड्रोन पानी के अंदर हिंद महासागर में स्थित हैं और रक्षा विश्लेषक एचआइ सटन (HI Sutton) ने चीन का हिंद महासागर में 14 सी विंग ग्लाइडर्स (14 Sea Wing Gliders) लॉन्च करने का दावा किया है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं इसकी संरचना, महत्व और विशेषताओं के बारे में और साथ ही कि चीन का यह कदम भारत के लिए खतरा क्यों है.
Created On: Jan 6, 2021 16:02 IST
Modified On: Jan 6, 2021 16:06 IST
China's underwater drones - Sea Wing Gliders
China's underwater drones - Sea Wing Gliders

चीन ने हिंद महासागर में पानी के अंदर ड्रोन का एक बेड़ा तैनात किया है जिसे वह कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सी विंग ग्लाइडर कहता है. रक्षा विश्लेषक HI सटन ने भी इस खबर का दावा किया है.

कई ट्विटर हैंडल के अनुसार पिछले दो वर्षों में हिंद महासागर में दो अन्य वैसे ही महासागर ग्लाइडर-प्रकार मानव रहित वाहन (ocean glider-type unmanned undersea vehicles) पाए गए हैं.

फोर्ब्स मैगजीन में लिखे रक्षा विशेषज्ञ एच आई सटन (Defence analyst HI Sutton) के लेख के अनुसार काफी संख्या में यह सी विंग ग्लाइडर तैनात किए गए हैं और यह अनक्रूड अंडरवाटर व्हीकल (Uncrewed Underwater Vehicle,UUV) किस्म के हैं. इन्हें यहाँ दिसंबर 2019 के मध्य लगाया गया था. इसके द्वारा चीन को फरवरी महीने तक 3400 से ज्यादा ऑब्जरवेशन प्राप्त हुए थे. लेख के अनुसार, चीन ने काफी बड़ी संख्या में इन ड्रोन्स को समुद्र में उतारा है.
यहीं आपको बता दें कि ये ड्रोन उसी तरह के हैं जैसे अमेरिका की नौसेना ने समुद्र की निगरानी में लगाए थे और इन्हें 2016 में चीन ने पकड़ा था. आश्चर्यजनक बात यह है कि चीन ने हिंद महासागर में वैसे ही ड्रोन को तैनात किया है.

सी विंग ग्लाइडर (Sea Wing Glider/ Haiyi) के बारे में

चीन इन अंडरवाटर ड्रोन को समुद्री विंग ग्लाइडर (Sea wing gliders) या एक Haiyi के रूप में कहता है, जिसे नौसेना के खुफिया उद्देश्यों के लिए अवलोकन करने के लिए हिंद महासागर में देखा गया है. यानी इनको लगाने का उद्देश्य नौसेना के लिए खुफिया जानकारी जुटाना है.

रक्षा विश्लेषक HI सटन के अनुसार ये ड्रोन काफी लंबे समय तक और लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम हैं. ये चीन के ड्रोन लगातार सूचनाएं और समुद्रीय आंकड़े एकत्रित कर रहे हैं. जिनका इस्तेमाल चीन की नौसेना के लिए खुफिया जानकारी जुटाने के रूप में भी किया जा रहा है.

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आइये अब जानते हैं कि सी विंग ग्लाइडर (Sea wing glider) क्या है?

- यह एक मानवरहित अंडरवाटर वाहन है जिसे चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोलॉजी (Chinese Academy of Sciences Institution of Oceanology) द्वारा विकसित किया गया है.

- यह सी विंग तेल से भरी उछाल क्षतिपूर्ति प्रणाली (buoyancy compensation system filled with oil) का उपयोग कर पानी के माध्यम से चलता है.

- ये ग्लाइडर अनपॉवर्ड (Unpowered) हैं. इसके बजाय वे परिवर्तनशील-उछाल संबंधी प्रणोदन (variable-buoyancy propulsion) को नियोजित करते हैं जो उन्हें डुबो देता है और फिर से सतह पर चढ़ा देता ह. यह दबाव वाले तेल से भरे गुब्बारे जैसे उपकरण को फुलाकर (Inflate) और डीफ्लेट (Deflate) करके किया जाता है.

- यह उन्हें बहुत लंबी अवधि के लिए चलने की अनुमति देता है, विशाल दूरी की यात्रा करने में मदद करता है. वे तेज़ या चुस्त नहीं हैं, इसलिए आमतौर पर लंबी दूरी के मिशनों के लिए नियोजित किया जाता है, जहां उन्हें तब तक अकेला छोड़ा जा सकता है जब तक कि उन्हें लाने या पिक करने की आवश्यकता न हो.

- इस ग्लाइडर का उपयोग समुद्र विज्ञान अनुसंधान (Oceanographic research) के लिए किया जाता है और इसमें समुद्री जल का तापमान, लवणता, इसकी टर्बिडिटी, ऑक्सीजन की मात्रा, क्लोरोफिल और महासागर के वर्तमान परिवर्तनों को मापने के लिए ऑनबोर्ड सेंसर भी हैं.

- इन्हें 2015 में पूर्वी चीन सागर और बाद में दक्षिण चीन सागर में भी तैनात किया गया था.

आखिर इन विंग्स (Wings) का उद्देश्य क्या है?

ग्लाइडर अनपॉवर्ड (Unpowered) होते हैं और इनमें बड़े पंख होते हैं ताकि वे लंबे समय तक चल सकें. इसलिए ये ग्लाइडर लंबे मिशन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार चीन ने हिंद महासागर में पानी के अंदर ड्रोन तैनात किए हैं.

कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य 

रक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक़, पिछले साल दिसंबर की रिपोर्टों के अनुसार 14 ग्लाइडरस को हिंद महासागर मिशन में नियोजित किया गया था लेकिन केवल 12 का ही उपयोग किया गया.

इसके अलावा, रक्षा विश्लेषक ने कहा कि ये चीनी ग्लाइडर जो हिंद महासागर में रखे गए हैं, कथित तौर पर समुद्र विज्ञान डेटा (Oceanography data) इकट्ठा कर रहे हैं, जो "हालांकि अहानिकर" (Sounds innocuous) लगता है, आमतौर पर यह नौसेना के खुफिया उद्देश्यों के लिए एकत्रित किया जाता है.

भारत के सीडीएस जनरल रावत ने कहा कि हिंद महासागर में 120 से अधिक युद्धपोत तैनात किए गए हैं, यही वजह है कि चीन की तैनाती को नौसेना के उद्देश्यों के साथ देखा जा रहा है. ऐसा इंडो पैसिफिक मार्ग को टेक ओवर करने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सामने आने वाली चुनौतियों के आधार पर, "हमें अपने रक्षा बलों की क्षमता निर्माण और क्षमता विकास के लिए संरचित दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है".

हाल ही में जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों जैसे कई देश इंडो पैसिफिक मार्ग में रुचि भी ले रहे हैं.

भारत को सीमाओं की रक्षा के लिए अपनी नौसेना और सेना की संरचना विकसित करनी चाहिए. इसके लिए, दीर्घकालिक स्ट्रक्चर प्लानिंग और रक्षा बलों की क्षमता निर्माण की आवश्यकता है. समृद्धि और संप्रभुता बनाए रखने के लिए एक शांतिपूर्ण समुद्री रेखा को बनाए रखना महत्वपूर्ण है.

आइए जानते हैं भारतीय युद्धपोत INS Vikramaditya के बारे में

 

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