जानें क्या है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) और किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

नए कृषि कानूनों में से एक कानून कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग यानि अनुबंध खेती की इजाज़त देता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) क्या है और किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
Created On: Dec 29, 2020 21:04 IST
Modified On: Dec 29, 2020 21:10 IST
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) और किसानों द्वारा इसका विरोध
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) और किसानों द्वारा इसका विरोध

सितंबर 2020 में केंद्र की मोदी सरकार तीन नए कृषि विधेयक लाई थी जिन्हें पहले भारतीय संसद में पारित किया गया और फिर 27 सितंबर 2020 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने स्वीकृति दी। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद तीनों कृषि विधेयक कानून बन चुके हैं।

जहां एक ओर सरकार का मानना है कि ये तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं वहीं दूसरी ओर किसानों ने इन कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों का मानना है कि इन कानूनों से उन्हें नुकसान और निजी खरीदारों (private buyers)और कॉरपोरेट घरानों (corporate houses) को फायदा होगा।

नए कृषि कानूनों में से एक कानून 'कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून, 2020' कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग यानि अनुबंध खेती की इजाज़त देता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) क्या है और किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

क्या है अनुबंध खेती यानि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming)?

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) के तहत किसान अपनी ही ज़मीन पर बिना कोई पैसा खर्च किए खेती करता है। इस तरह की खेती में कॉन्ट्रैक्टर खाद से लेकर बीज, सिंचाई और मजदूरी का सारा खर्च उठाता है और एक तय दाम पर फसल को खरीदता है।  जो भी कंपनी या आदमी किसान के साथ अनुबंध करता है उसे कॉन्ट्रैक्टर कहते हैं। 

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ खेती की दशा और दिशा दोनों सुधारती है। आइए नज़र डालते हैं  कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) से होने वाले फायदों (benefits) पर:

1- किसानों को खेती के बेहतर रेट मिलते हैं।
2- बाजार में होने वाले रेट के उतार-चढ़ाव का किसान पर कोई असर नहीं होता है।
3- किसानों को खेती करने के पुराने तरीकों में सुधार और नए तरीकों को सीखने का अवसर मिलता है। 
4- किसानों को खेती में प्रयोग होने वाले बीज, फर्टिलाइजर आदि को चुनने में मदद मिलती है।
5- इस तरह से की जाने वाली खेती के कारण फसलों की क्वॉलिटी और मात्रा दोनों में सुधार देखने को मिलता है। 

आइए जानते हैं कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) से जुड़ी चुनौतियों (challenges) के बारे में:

1- कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत बड़े खरीदारों के एकाधिकार को बढ़ावा मिलता है। 
2- इसके तहत किसानों को खेती की कम कीमत देकर उनका शोषण करने की संभावना रहती है।
3- बड़े किसानों के मुकाबले छोटे किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) का कम लाभ मिलेगा।

कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून 2020

1- अधिनियम (Act): यह कानून किसी भी किसान के उत्पादन या किसी भी खेत की पैदावार से पहले किसान और खरीदार के बीच एक समझौते के माध्यम से अनुबंध खेती के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा है।

2- प्रावधान (Provisions):

(क) फार्मिंग एग्रीमेंट (Farming Agreement): ये अधिनियम कृषि उपज के उत्पादन या किसी भी खेत की पैदावार से पहले किसान और खरीदार के बीच कृषि समझौता प्रदान करता है।

(ख) खेती समझौते की न्यूनतम अवधि (Minimum Period of Farming Agreement): कृषि समझौते की न्यूनतम अवधि एक फसल के मौसम या पशुधन के एक उत्पादन चक्र के लिए होगी।

ग) कृषि समझौते की अधिकतम अवधि (Maximum Period of Farming Agreement): कृषि समझौते की अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि यदि किसी भी कृषि उपज का उत्पादन चक्र लंबा है और पांच साल से आगे जा सकता है, तो कृषि समझौते की अधिकतम अवधि किसान और खरीदार द्वारा पारस्परिक रूप से तय की जा सकती है और स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख कृषि समझौते में किया जा सकता है।

(घ) कृषि उपज का मूल्य निर्धारण ( Pricing of Farming Produce): खेती की उपज का मूल्य निर्धारण और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया समझौते में उल्लिखित होनी चाहिए। भिन्नता के अधीन कीमतों के लिए एक गारंटीकृत मूल्य और गारंटी मूल्य के ऊपर किसी भी अतिरिक्त राशि के लिए एक स्पष्ट संदर्भ समझौते में निर्दिष्ट होना चाहिए।

(ड) विवाद का निपटारा (Settlement of Dispute): इस कानून के तहत विवादों के निपटारे के लिए सुलह बोर्ड, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और अपीलीय प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है। 

मुख्य बिंदु

1- इस कानून के तहत किसान  व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों आदि से सीधे जुड़ सकेंगे।
2- किसान बीज बोने से पहले ही खरीदार के साथ कृषि समझौता कर सकते हैं जिसमें उपज के दाम निर्धारित होंगे। इस वजह से बाजार की अनिश्चितता का जोखिम किसानों से हटकर प्रायोजकों पर चला जाएगा।
3- इस विधेयक के माध्यम से कृषि क्षेत्र में शोध एवं नई तकनीकी को बढ़ावा मिलेगा। 

किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

1- किसानों का मानना है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से उनका पक्ष कमज़ोर होगा और वे उपज की कीमतें निर्धारित नहीं कर पाएंगे।

2- छोटे किसानों को डर है कि वो कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग नहीं कर पाएंगे क्योंकि प्रायोजकों की पूर्ण रुप से परहेज करने की संभावना है।

3- किसानों का मानना है कि नए कानून के तहत उन्हें अधिक परेशानी होगी।

4- किसानों को लगता है कि यदि कोई भी विवाद उत्पन्न होता है तो इसके निपटारे में बड़ी कंपनियों को लाभ मिलेगा।

केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण

1- केंद्र सरकार के अनुसार, किसानों को अनुबंध में पूर्ण रूप से स्वतंत्रता होगी और वे अपनी इच्छानुसार उपज के दाम तय कर बेच सकेंगे। इतना ही नहीं, किसानों को तीन दिनों के भीतर उपज की रकम प्राप्त होगी। 

2- केंद्र सरकार देशभर में 10 हज़ार कृषक उत्पादक समूह निर्मित कर रही है जिसके तहत छोटे किसानों को उनकी फसल के लिए उचित रकम मिल सकेगी। 

3- केंद्र सरकार के अनुसार, कृषि अनुबंध के बाद किसानों को फसल बेचने के लिए व्यापारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और खरीदार खेत से खुद फसल लेकर जाएगा।

4- केंद्र सरकार के अनुसार, यादि कोई भी विवाद उत्पन्न होता है तो उसे स्थानीय स्तर पर ही 30 दिनों के भीतर निपटाया जा सकेगा।

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