पेमेंट बैंक और कमर्शियल बैंक में क्या अंतर होता है?

भारत में पेमेंट बैंक और कमर्शियल बैंक दोनों ही बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अधीन कार्य करते हैं लेकिन फिर भी कमर्शियल बैंकों के काम का दायरा पेमेंट बैंकों की तुलना में ज्यादा बड़ा है. पेमेंट बैंक और कमर्शियल बैंक में सबसे बड़ा अंतर यह है कि कमर्शियल बैंक; लोगों से कितनी भी राशि को जमा के रूप में स्वीकार कर सकते हैं लेकिन पेमेंट बैंक एक ग्राहक से अधिकतम 1 लाख रुपए तक का जमा स्वीकार कर सकते हैं.
Created On: Mar 13, 2018 00:18 IST
Payment bank vs Commercial banks
Payment bank vs Commercial banks

वर्ष 2017 से देश में 11 पेमेंट बैंक कार्य कर रहे हैं. पेमेंट बैंक को कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया है और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 के तहत लाइसेंस प्राप्त हुआ है.

पेमेंट बैंकों की स्थापना का मुख्य उद्येश्य ऐसे लोगों को बैंकिंग क्षेत्र से जोड़ना है जो कि भारत के ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनकी आमदनी बहुत कम है और अक्सर काम के सिलसिले में शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं. ऐसे लोगों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्तीय समायोजन की नीति के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में पेमेंट बैंकों को स्थापित करना शुरू कर दिया है.

पेमेंट बैंकों को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999, निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 और जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम अधिनियम, 1961 के द्वारा भी शासित किया जायेगा.

यहाँ पर यह बताना भी जरूरी है कि भारत में वाणिज्यिक बैंकों की निगरानी और निरीक्षण का अधिकार रिज़र्व बैंक को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के आधार पर मिला हुआ है. इस प्रकार पेमेंट बैंकों और कमर्शियल बैंकों की निगरानी एक ही अधिनियम के अनुसार की जाती है लेकिन फिर भी इन दोनों की कार्य शैली में बहुत अंतर पाया जाता है. आइये जानते हैं कि ये दोनों एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं;

1. भारत में बैंकिंग प्रणाली की शुरुआत 1786 में बैंक ऑफ कलकत्ता की स्थापना के साथ मानी जाती है जबकि पेमेंट बैंक की शुरुआत 2017 में रिज़र्व बैंक द्वारा 11 कंपनियों को पेमेंट बैंक खोलने की अनुमति देने के साथ हुई  है.

2.  कमर्शियल बैंक; लोगों से कितनी भी राशि बैंक जमा के रूप में स्वीकार कर सकते हैं लेकिन पेमेंट बैंक एक ग्राहक से अधिकतम 1 लाख रुपए तक का ही बैंक जमा स्वीकार कर सकते हैं.

3. पेमेंट बैंक; अपने खाता धारकों को एटीएम या डेबिट कार्ड तो जारी कर सकेंगे लेकिन क्रेडिट कार्ड जारी नही कर सकते हैं जबकि कमर्शियल बैंकों के लिए ऐसा कोई नियम नही है.

4. कमर्शियल बैंक को खोलने के लिए शुरुआत में 500 करोड़ रुपये की मिनिमम पेड-उप कैपिटल की जरुरत होती है लेकिन पेमेंट बैंक को खोलने के लिए मिनिमम 100 करोड़ रुपये की पेड-उप कैपिटल की जरुरत होती है.

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5. पेमेंट बैंक, लोगों को ऋण या उधार नहीं दे सकते हैं जबकि कमर्शियल बैंकों की मुख्य कमाई लोगों को दिए गए ऋण से ही होती है.

6. पेमेंट बैंक; NRI व्यक्ति से जमा स्वीकार नही कर सकते हैं. अर्थात भारतीय मूल के जो लोग विदेशों में बस गए हैं उनके रुपयों को जमा के रूप में स्वीकार नही कर सकते हैं लेकिन कमर्शियल बैंक ऐसा कर सकते हैं.

7. पेमेंट बैंकों को, दूसरे बैंकों से अलग दिखने के लिए अपने नाम में "पेमेंट्स बैंक" शब्द का उपयोग करना होगा. लेकिन कमर्शियल बैंकों को अलग दिखने के लिए ऐसे किसी भी टाइटल का प्रयोग नही करना पड़ता है.

8. पेमेंट बैंकों को अपनी कुल मांग जमा के कम से कम 75% हिस्से को कम से कम एक वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना होगा जबकि कमर्शियल बैंकों को इस तरह की प्रतिभूतियों में बहुत कम निवेश करना होता है.

उम्मीद है कि ऊपर दिए गए बिन्दुओं को पढ़ने के बाद आप स्पष्ट रूप से यह समझ गए होंगे कि किन-किन बिन्दुओं पर कमर्शियल बैंक और पेमेंट बैंक एक दूसरे से भिन्न होते हैं और किन-किन बिन्दुओं पर इन दोनों में समानता पाई जाती है.

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