जैव-विविधता के विभिन्न स्तर

जैव-विविधता शब्द का प्रथम प्रयोग 1985 में डब्ल्यू. जी. रोजेन ने किया था. हालांकि इस शब्द का संकल्पनात्मक प्रयोग वैज्ञानिक विल्सन द्वारा 1986 में अमेरिकी जैव-विविधता फोरम में किया गया था. इस लेख में हम जैव-विविधता के विभिन्न स्तरों का विवरण दे रहे हैं.
Created On: Dec 22, 2017 18:09 IST
Different Levels of Biodiversity
Different Levels of Biodiversity

जैव विविधता को अंग्रेजी में Biodiversity कहते हैं जो दो शब्द Bio और Diversity से मिलकर बना है. यहां Bio का अर्थ जीव है तथा Diversity का अर्थ विविधता है. अतः जैव-विविधता या जैविक-विविधता का आशय पारिस्थितिक तंत्र में विद्यमान सजीव प्राणियों की विविधता तथा संग्रह से है.
जैव-विविधता शब्द का प्रथम प्रयोग 1985 में डब्ल्यू. जी. रोजेन ने किया था. हालांकि इस शब्द का संकल्पनात्मक प्रयोग वैज्ञानिक विल्सन द्वारा 1986 में अमेरिकी जैव-विविधता फोरम में किया गया था. वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो-डी-जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मलेन के दौरान विभिन्न सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित जैव-विविधता समझौते के अनुसार स्थलीय, समुद्री तथा अन्य जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और पारिस्थितिकी परिसरों में रहने वाले सभी जीवों के बीच पाए जाने वाली असमानता को जैव-विविधता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है. इसमें एक ही प्रजाति के जीवों के बीच विविधता, प्रजातियों के बीच विविधता और पारितंत्रीय विविधता शामिल है. वैज्ञानिकों के अनुसार पूरी पृथ्वी पर सर्वाधिक जैव विविधता भूमध्यरेखीय क्षेत्र में पायी जाती है.

जैव-विविधता के स्तर

जैव-विविधता को मुख्यतः तीन स्तरों में बांटा जाता है, जो निम्नलिखित हैं:
1. आनुवांशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के विभिन्न जीवों में जीनों के क्रम की भिन्नता के कारण जो भिन्नता होती है उसे आनुवांशिक विविधता कहते हैं. आनुवांशिक विविधता किसी प्रजाति के प्रत्येक सदस्य में विशिष्ट लक्षण एवं विशेषताओं का समावेश करता है. इसी कारण समान प्रजाति के अंदर कुछ प्राणी दूसरों से लम्बे होते हैं, कुछ की आंखे भूरी तो कुछ की नीली होती है. आनुवांशिक विविधता के कारण ही एक प्रजाति के जीव की अलग-अलग नस्लें होती हैं. उदाहरण के लिए, कुत्ते की अलग-अलग नस्लें आनुवांशिक विविधता का ही परिणाम है. आनुवांशिक विविधता विशिष्ट जीव या सम्पूर्ण प्रजाति को बदलते पर्यावरण से अनुकूलन में सहायता करती है और पर्यावरणीय कारकों में दबाव की स्थिति में संपूर्ण प्रजाति के विलुप्त होने के खतरे को कम करती है.
2. प्रजाति विविधता (Species Diversity): प्रजाति विविधता का आशय एक विशेष पारिस्थितिक तंत्र में प्रजातियों की संख्या अथवा विविधता से है. अलग-अलग प्रजाति के जीवों में आनुवांशिक अनुक्रम में स्पष्ट रूप से भिन्नता होती है और उनके बीच प्रजनन नहीं होता है. यद्यपि निकट से संबंधित प्रजातियों के आनुवांशिक गुणों में बहुत अधिक समानता होती है. जैसे- मानव और चिम्पांजी के लगभग 98.4% जीन समान हैं.
एक विशेष पारिस्थितिक तंत्र में प्रजाति विविधता को 0-1 के बीच मापा जाता है. 0 एक आदर्श स्थिति होती है जो उस पारिस्थितिक तंत्र में अनंत विविधता दर्शाती है. वहीं “1” दर्शाता कि उस विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र में केवल एक प्रजाति निवास करती है.
3. पारिस्थितिक विविधता (Ecosystem Diversity): पारिस्थितिक विविधता का आशय किसी भौगोलिक क्षेत्र में पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता से है. विश्व में विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिकतंत्र हैं जिनमें वन, घास के मैदान, मरुस्थल, पर्वत, नदी, झील, समुद्र आदि प्रमुख हैं. प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र की अपनी विशिष्टता होती है.
आनुवांशिक विविधता तथा प्रजातीय विविधता की अपेक्षा पारिस्थितिकीय विविधता की माप कठिन होती है, क्योंकि सामान्यतया पारितंत्रीय सीमाएं व्यवस्थित रूप से निर्धारित नहीं होती है. सभी पारिस्थितिकीय विविधताओं में प्रवाल पारिस्थितिकीय तंत्र में सर्वाधिक जैव-विविधता पायी जाती है.
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