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किसान क्रेडिट कार्ड योजना: पात्रता, उद्देश्य और विशेषताएं

03-AUG-2018 18:49

    Kisan Credit Card

    किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना 1998-99 में शुरू की गई थी. यह योजना छोटे किसान, सीमांत किसान, फसल सांझीदार, पट्टेदार और किरायेदार किसान, स्वयं सहायता समूह को आसान दरों पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गयी थी.
    किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए आर.वी. गुप्ता समिति की सिफारिश पर कृषि और ग्रामीण विकास (नाबार्ड) ने एक ड्राफ्ट तैयार किया था.

    किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के लाभ प्राप्त करने के लिए कौन पात्र है;
    1. छोटे किसान

    2. सीमान्त किसान

    3. फसल के साझीदार

    4. पट्टेदार और किरायेदार किसान

    5. स्व सहायता समूह (SHGs)
    यदि किसान 1 लाख रुपये से अधिक का ऋण लेना चाहता है तो उसे अपनी फसल या जमीन बैंक के पास गिरवी रखनी होगी. हालाँकि कोलेटरल सिक्यूरिटी के बारे में नियम बैंक के विवेकाधिकार पर भी निर्भर करते हैं. यदि एक बार किसान क्रेडिट कार्ड बन गया तो वह 5 साल के लिए वैध होगा हालाँकि बैंक, किसान क्रेडिट कार्ड की वार्षिक समीक्षा और उधारकर्ता के प्रदर्शन के आधार पर इसमें परिवर्तन कर सकता है.

    किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के उद्देश्य;
    किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लॉन्च होने से पहले; बड़ी संख्या में किसान, सूदखोरों और रिश्तेदारों  से ऊंची दर पर उधार लेने को मजबूर होते थे लेकिन अब उन्हें उर्वरक, बीज, कीटनाशकों और अन्य खेती के उपकरणों को खरीदने के लिए इन लोगों के ऊपर निर्भर नहीं रहना पड़ता है.

    इस योजना के मुख्य उद्देश्य हैं;
    1. कृषि और संबद्ध गतिविधियों (भूमि विकास, पंप सेट, वृक्षारोपण, ड्रिप सिंचाई इत्यादि) में निवेश के लिए देना

    2. किसानों की उपभोग सम्बन्धी आवश्यकताओं के लिए ऋण देना

    3. किसानों को ब्याज की सस्ती दर पर संस्थागत ऋण प्रदान करना

    4. आवश्यकता के समय क्रेडिट प्रदान करना

    5. फसल कटने के बाद के खर्चों के लिए ऋण देना

    6. कृषि संपत्तियों और कृषि से जुड़े गतिविधियों के रखरखाव के लिए ऋण देना

    इस योजना को किसने लागू किया?
    केसीसी योजना को सभी सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा पूरे देश में लागू किया गया है. सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में इस योजना की निगरानी का काम नाबार्ड और वाणिज्यिक बैंकों के संबंध में यह काम रिज़र्व बैंक द्वारा किया जाता है.

    आरबीआई और नाबार्ड द्वारा केसीसी योजना में एक नई सुविधा शुरू की गई है जो कि किसानों को एटीएम कार्ड प्रदान करती है जिसका उपयोग सभी एटीएम और बिक्री के टर्मिनल (point of sale terminals) पर किया जा सकता है.

    इस योजना के तहत ब्याज दर क्या है?
    RBI ने सभी वाणिज्यिक बैंकों को आदेश दिया है कि वे प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र (priority sector lending) के लिए कुल ऋण में से 18% कृषि ऋण के लिए दें.
    इसी तरह, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को आदेश दिया गया है कि वे अपने कुल ऋण में से 18% कृषि क्षेत्र को दें और और छोटे और सीमांत किसानों को उधार देने के लिए 8% का उप-लक्ष्य भी पूरा करें.
    किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसान 5 वर्षों के लिए 3 लाख तक का अल्पकालिक ऋण ले सकते हैं. यदि किसान इस लोन राशि को एक साल के अंदर जमा कर देते हैं तो उन्हें ब्याज में 3% की और छूट मिल जाती है और बैंक को दिया जाने वाला ब्याज केवल 4% ही होता है.
    किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज
    1. विधिवत भरा आवेदन पत्र

    2. पहचान प्रमाण- मतदाता पहचान पत्र / पैन कार्ड / पासपोर्ट / आधार कार्ड, / ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि.

    3. पता प्रमाण पत्र: मतदाता पहचान पत्र / पासपोर्ट / आधार कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि.

    4. पास के क्षेत्रों में स्थित बैंकों से लिया गया “नो ड्यू सर्टिफिकेट”. ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि आप पहले से ही तो कर्जदार नहीं हैं.

    तो यह थी भारत सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड योजना के बारे में पूरी जानकारी. भारत में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं जैसे बैंकिंग, RBI, क्लर्क इत्यादि के लिए यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है.

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