Ganesh Chaturthi 2020: तिथि, समय, इतिहास, महत्व, एवं तथ्य

Ganesh Chaturthi 2020: गणेश चतुर्थी देश में हर साल पूरे उत्साह के साथ मनायी जाती है. यह त्यौहार भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है. आइए गणेश चतुर्थी का पर्व, इतिहास, महत्व और उत्सव के बारे में अध्ययन हैं.
Created On: Aug 21, 2020 18:53 IST
Modified On: Aug 21, 2020 18:59 IST
Ganesh Chaturthi
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Ganesh Chaturthi 2020: यह त्यौहार दस दिनों तक मनाया जाता है और लोग इसे धूम धाम से मनाते हैं. इस दिन भगवान गणेशजी का जन्म हुआ था. उन्हें ज्ञान, समृद्धि, सौभाग्य और  नई शुरुआत का देवता माना जाता है. 

ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेशजी का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के दौरान हुआ था. इसलिए, यह भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) महीने के चौथे दिन (चतुर्थी) से शुरू होता है जो हिंदू कैलेंडर का छठा महीना है. इस साल यह 22 अगस्त, 2020 से मनाया जाएगा. अन्य 108 नामों में से, भगवान गणेशजी को गणेश, गजदंत, गजानन, इत्यादि नामों से भी जाना जाता है.

गणेश चतुर्थी के बारे में

यह त्यौहार भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) महीने के चौथे दिन (चतुर्थी) से शुरू होता है जो हिंदू कैलेंडर का छठा महीना है. इस साल यह 22 अगस्त, 2020 से मनाया जाएगा. अनंत चतुर्दशी पर 10 दिनों के बाद त्यौहार या गणेशोत्सव का समापन होता है, जिसे गणेश विसर्जन के रूप में भी जाना जाता है. अनंत चतुर्दशी पर भक्त भगवान गणेशजी की मूर्ति को जल में विसर्जित करते हैं.

गणपति स्थापन और गणपति पूजा मुहूर्त के बारे में

मध्याह्न के दौरान भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेशजी का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था. हिन्दु दिन के विभाजन के अनुसार मध्याह्न काल, अंग्रेजी समय के अनुसार दोपहर के तुल्य होता है. मध्याह्न मुहूर्त में, भक्त-लोग पूरे विधि-विधान से गणेश पूजा करते हैं जिसे षोडशोपचार गणपति पूजा के नाम से जाना जाता है.

गणेश चतुर्थी: इतिहास

पौराणिक कथा के अनुसार देवी पार्वती स्नान करने से पहले अपने मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वार पाल बना देती हैं. उसे स्नान करने के दौरान किसी को भी अंदर आने से मना करती है और रक्षा करने के लिए कहती हैं. ऐसा आदेश देती हैं कि वे किसी को भी प्रवेश करने न दें, चाहे वो कोई भी हो. हलाकि, जब भगवान शिव परिसर में प्रवेश करना चाहते हैं तो गणेशजी उन्हें अपनी माता कि आज्ञा पालन करते हुए रोक देते हैं. 
भगवान शिव ने कोशिश की लेकिन उनकी पत्नी पार्वती से मिलने के सभी प्रयास विफल हो गए. तब भगवान शिव ने अपनी सेना भेज दी परन्तु कुछ ही समय में बालक गणेशजी ने विजय प्राप्त कर ली. इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और स्वयं बालक गणेश से युद्ध किया. उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक गणेश का सिर काट दिया. जब देवी पार्वती को इसका एहसास हुआ, तो उनका दिल टूट गया था. वे क्रोधित हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने कि ठान ली. भगवान शिव और सभी देवी देवताओं ने उन्हें शांत करने की कोशिश की लेकिन विफल रही और फिर भगवान शिव ने बालक गणेश को वापस लाने का वादा किया. महामृत्युंजय रुद्र ने उनके अनुरोध को स्वीकारते हुए एक गज के कटे हुए मस्तक को भगवान  गणेशजी के धड़ से जोड़ कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया. भगवान गणेशजी को गणों के नेता के रूप में नामित किया गया था.

गणेश चतुर्थी: उत्सव

यह त्यौहार 10 दिनों तक मनाया जाता है. विभिन्न लोग भगवान गणेश की मूर्ति को घर, कार्यालय स्थानों, या स्थानीय क्षेत्र के पंडालों में लाते हैं. लोग भगवान गणेशजी के लिए विभिन्न प्रकार की सजावट करते हैं और भगवान गणेशजी के सामने प्रसाद में मोदक, पायसम, नारियल चावल, मोतीचूर के लड्डू, श्रीखंड और कई अन्य मिठाइयाँ रखते हैं.

इन दस दिनों के दौरान भक्त पंडालों, मंदिरों में जाते हैं, भगवान गणेशजी की पूजा करते हैं, सम्मान करते हैं और प्रार्थना करते हैं.

गणपति विसर्जन पर भगवान गणेशजी की मूर्तियों को जल में विसर्जित किया जाता है. भक्त 'गणपति बप्पा मोरया' का उच्चारण करते हैं.
यह भी माना जाता है कि भगवान गणेशजी हमारी सभी चिंताओं को दूर करते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं. लेकिन इस साल महामारी के कारण उत्सव कुछ अलग होगा.

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