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COVID-19 Pandemic: कोरोना वायरस हमारे मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को कैसे प्रभावित करता है?

हाल ही में हमने सुना था कि कोरोना वायरस लंग्स को टारगेट करता है और साथ ही किडनी, लीवर और ब्लड वेसल्स को भी. परन्तु ऐसा कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को भी प्रभावित कर सकता है. आइये इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं .
Sep 14, 2020 15:44 IST
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COVID-19 Pandemic
COVID-19 Pandemic

जैसा की हम जानते हैं कि कोरोना वायरस के मामले पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ये महामारी अलग-अलग लक्षणों से लोगों को संक्रमित कर रही है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना वायरस का असर फेफड़ों, किडनी और दिल पर ज्यादा पड़ता है परन्तु एक स्टडी के अनुसार कोरोना वायरस दिमाग पर भी असर कर सकता है. यह वायरस मस्तिष्क की कोशिकाओं को कई गुना तेज़ी से संक्रमित भी कर सकता है.

एक नए अध्ययन में पहला स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि कुछ लोगों में, कोरोना वायरस मस्तिष्क की कोशिकाओं पर हमला करता है, और मस्तिष्क की कोशिकाओं को हाईजैक करके खुद कि कॉपी बनाना शुरू कर देता है. यह वायरस आस-पास के सभी ऑक्सीजन को भी चूस लेता है, जिसके कारण आस-पास की कोशिकाओं की भी मृत्यु होने लगती है.

यानी ऐसा कहा जा सकता है कि जो पेशेंट्स कोरोना वायरस से संक्रमित हैं उनमें न्यूरोलॉजिकल लक्षण पाए जा रहे हैं जिसके कारण उनको सर दर्द होता है, कुछ समझ नहीं पाते हैं इत्यादि. ये सब इसलिए होता है जब वायरस दिमाग को अटैक करता है. अभी इस पर काफी रिसर्च होना बाकी है.

कोरोना वायरस का नाम ‘कोरोना’ ही क्यों रखा गया है?
आइये जानते हैं इस रिसर्च के बारे में 

यदि मस्तिष्क संक्रमित हो जाता है, तो यह एक घातक परिणाम हो सकता है, "येल विश्वविद्यालय के एक प्रतिरक्षाविद् अकीको इवासाकी ( Akiko Iwasaki, an immunologist at Yale University) ने कहा, जिन्होंने इस काम का नेतृत्व किया.

अध्ययन ऑनलाइन पोस्ट किया गया था और अभी तक प्रकाशन नहीं हुआ है. लेकिन कई शोधकर्ताओं ने कहा कि यह सावधान और सुरुचिपूर्ण था, कई तरीकों से दिखा रहा है कि वायरस मस्तिष्क की कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है.

नए अध्ययन में, इवासाकी और उनके सहयोगियों ने मस्तिष्क के संक्रमण को तीन तरीकों से प्रलेखित किया: एक माउस मॉडल के जरिये, COVID-19 से मरने वाले व्यक्ति के मस्तिष्क के ऊतकों को देखा गया, और एक प्रयोगशाला डिश में मस्तिष्क कोशिकाओं के समूहों की नकल करने के लिए दिमाग की तीन आयामी संरचना (three dimensional structure).

कोरोना वायरस तेजी से सिनेप्स (synapses) की संख्या को कम करने लगता है यानी न्यूरॉन्स के बीच के संबंध को. वायरस ACE2 नामक सतह पर एक प्रोटीन के माध्यम से एक कोशिका को संक्रमित करता है. यह प्रोटीन पूरे शरीर में और विशेष रूप से फेफड़ों में दिखाई देता है.

माउस मॉडल के बारे में जानते हैं:

इवासाकी की टीम ने चूहों के दो सेट देखे- एक ACE2 रिसेप्टर के साथ केवल मस्तिष्क में और दूसरा रिसेप्टर के साथ केवल फेफड़ों में व्यक्त किया. जब उन्होंने वायरस को इन चूहों में पेश किया, तो मस्तिष्क से संक्रमित चूहों ने तेजी से वजन कम किया और छह दिनों के भीतर उनकी मृत्यु हो गई. फेफड़े से संक्रमित चूहों ने ऐसा नहीं किया.

माउस अध्ययनों से जुड़ी कैविटीज़ के बावजूद, परिणाम अभी भी सुझाव देते हैं कि मस्तिष्क में वायरस का संक्रमण श्वसन संक्रमण इवासाकी की तुलना में अधिक घातक हो सकता है.

अन्य शोधकर्ताओं के अनुसार:

यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उदासी और घबराहट भी रोग का लक्षण हो सकता है और ऐसा तब देखने को मिलता है जब वायरस तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है. 

शोधकर्ता डॉ.  अहमद सेदघाट के मुताबिक, 114 मरीजों पर अध्ययन के बाद ये परिणाम सामने आया है. इनमें कोरोना वायरस के मुख्य लक्षण बुखार, सर्दी-जुकाम भी थे. शोध में बताया गया कि 47.4 फीसदी लोग लक्षणों के बाद उदास रहने लगे थे और 21.1 फीसदी लोगों ने कहा कि संक्रमण के बाद उनमें उदासीनता आई. 44.7 फीसदी मरीजों में हल्की व 10.5 फीसदी गंभीर रूप से चिंता थी.

उत्तरी फ़्रांस में स्थित स्ट्रासबर्ग विश्वविद्यालय के अस्पताल से डॉक्टर जूली का कहना है कि "मरीज़ बेहद उत्तेजित थे. कई को न्यूरोलॉजिकल समस्याएं थीं. मुख्य रूप से भ्रम और प्रलाप जैसी दिक्कतें. यह पूरी तरह से असामान्य और डरावना था, ख़ासकर इसलिए क्योंकि हमारे द्वारा जिनका इलाज किया गया, उनमें बहुत से लोग काफ़ी युवा थे. वे 30 से 49 वर्ष के बीच थे और कुछ तो सिर्फ़ 18 साल के थे."

यहाँ तक कि फरवरी में चीन के शोधकर्ताओं ने वुहान शहर के रोगियों पर एक अध्ययन के बाद यह पाया था कि "कोरोना वायरस संक्रमण का असर लोगों के मस्तिष्क पर भी हुआ."

COVID-19 के मरीज़ों में किस प्रकार की न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हो रही हैं?

कुछ अध्ययनों से यह पता चला है कि COVID-19 के रोगियों को कुछ न्यूरोलॉजिकल परेशानियाँ भी होती हैं."

इस अध्ययन के अनुसार COVID-19 के मरीज़ों में सिरदर्द, सूंघने की शक्ति में कमी (एनोस्मिया) और शरीर में हल्की झनझनाहट (आर्कियोप्लास्टीसिया) जैसे हल्के लक्षणों के अलावा बोलने में असमर्थता (अफासिया), दिल का दौरा या अन्य दौरे पड़ने जैसे गंभीर लक्षण भी शामिल हैं.

कोरोना वायरस संक्रमण का प्रभाव अधिक बढ़ने पर होने वाली बीमारी COVID-19 के कितने मरीज़ो में न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देते हैं, इसे लेकर अनुमान अलग-अलग हैं.

दिमाग़ी परेशानी से जुड़े लक्षण: कई शोधकर्ताओं के अनुसार COVID-19 के मरीजों में दिख रहे ये न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिमाग़ में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण हैं जो साँस की गंभीर समस्या होने पर आमतौर पर होती है. साथ ही आपको बता दें कि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस सीधे तौर पर भी दिमाग़ पर हमला कर सकता है.
कुछ मरीजों में, दिमाग में सूजन वायरल मेनिनजाइटिस भी पाया गया है. यहाँ तक कि चीनी शोधकर्ताओं को भी गंभीर इन्सेफ़ेलाइटिस से ग्रस्त एक 56 वर्षीय मरीज़ के सेरेब्रोस्पाइनल फ़्लूइड में कोरोना वायरस के नमूने मिले थे.

1918 में महामारी का कारण बने इन्फ़्लुएंज़ा वायरस ने भी कुछ लोगों के मस्तिष्क पर काफ़ी प्रभाव डाला था, कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार. यूके में 1957 में फैली महामारी के बाद भी बहुत सारे मरीज़ डिप्रेशन से पीड़ित हुए थे. 

शोधकर्ताओं को यह अनुमान लगाने के लिए कई ऑटोप्सी नमूनों का विश्लेषण करने की आवश्यकता होगी कि मस्तिष्क का संक्रमण कितना आम है और क्या यह माइलडर बीमारी वाले लोगों में मौजूद है या तथाकथित long-haulers में, जिनमें से कई में न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का एक मेजबान है.

COVID-19 के रोगियों का चालीस प्रतिशत 60% डॉ. रॉबर्ट स्टीवंस, जो जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में एक न्यूरोलॉजिस्ट है के अनुसार न्यूरोलॉजिकल और मनोरोग संबंधी लक्षणों का अनुभव करता है. लेकिन लक्षण मस्तिष्क की कोशिकाओं पर हमला करने वाले वायरस से सभी स्टेम नहीं हो सकते हैं, वे पूरे शरीर में व्यापक सूजन का परिणाम भी हो सकते हैं.

बहुत से वैज्ञानिकों को विश्वास है कि कोरोना वायरस संक्रमण फेफड़ों और साँस लेने की प्रणाली से नसों के तंत्र के लिए कहीं ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो सकता है. 

इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि COVID-19 मरीजों के मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को प्रभावित यानी नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है. अभी इस पर काफी रिसर्च होनी बाकी है.

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