ICC किस आधार पर खिलाडियों की रैंकिंग जारी करता है?

ICC प्लेयर रैंकिंग एक ऐसी तालिका है जहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रदर्शन को एक अंक आधारित प्रणाली (Points Based System) का उपयोग करके रैंक दिया जाता है. खिलाड़ियों को 0 से 1000 अंकों के पैमाने पर रेट किया जाता है. यदि किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन उसके पिछले प्रदर्शन से बेहतर रहता है तो उसके अंक बढ़ जाते हैं; और अगर उनके प्रदर्शन में गिरावट आती है तो उसके अंक कम हो जाते हैं. आइये इसके बारे में विस्तार से इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.
Created On: Mar 12, 2021 15:19 IST
Modified On: Mar 12, 2021 15:19 IST

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली 10 फरवरी, 2021 को आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में पांचवें स्थान पर पहुंच गए वहीं जो रूट तीसरे स्थान पर. आइये इस लेख में जानते हैं कि आखिर ICC खिलाड़ियों की इस रैंकिंग को कैसे बनाता है. 

ICC प्लेयर रैंकिंग एक ऐसी तालिका है जहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रदर्शन को एक अंक आधारित प्रणाली (Points Based System) का उपयोग करके रैंक दिया जाता है.

खिलाड़ियों को 0 से 1000 अंकों के पैमाने पर रेट किया जाता है. यदि किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन उसके पिछले प्रदर्शन से बेहतर रहता है तो उसके अंक बढ़ जाते हैं; अगर उनके प्रदर्शन में गिरावट आती है तो उनके अंक कम हो जाते हैं.

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एक मैच में विभिन्न परिस्थितियों के दौरान खिलाड़ी के प्रदर्शन के आधार पर प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन की गणना पहले से तय एक एल्गोरिथ्म के आधार पर की जाती है. यह एल्गोरिथ्म अपनी गणना में इस बात का भी ध्यान रखती है कि किसी खिलाड़ी ने मैच की किस परिस्थिति में कितने रन बनाये या कितने विकेट लिए थे. यदि खिलाड़ी ने अपनी टीम के बहुत संकट में होने के समय टीम के लिए अच्छा योगदान किया है तो उसके प्रदर्शन की वैल्यू अधिक मानी जाती है.

इस गणना प्रक्रिया में कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं है, और कोई व्यक्तिपरक मूल्यांकन (subjective assessment) नहीं किया जाता है. यहाँ पर यह भी बताना जरूरी है कि खिलाड़ी के प्रदर्शन की गणना में गिने जाने वाले फैक्टर्स टेस्ट क्रिकेट, वन डे और T-20 के लिए अलग अलग होते हैं.

ICC रैंकिंग गणना में ‘रैंकिंग और रेटिंग’ में अंतर होता है. रैंकिंग से मतलब ICC की तालिका में खिलाड़ी की पोजीशन या रैंक से होता है जबकि रेटिंग का मतलब खिलाड़ी द्वारा प्राप्त किये गये पॉइंट्स से होता है. यहाँ इतना ध्यान रहे कि रेटिंग पॉइंट्स के आधार पर ही रैंकिंग तय होती है.

यह कैसे तय होता है कि इस लिस्ट में कौन शामिल किया जायेगा?

ICC की टेस्ट लिस्ट में उन खिलाड़ियों को शामिल किया जाता है जो कि पिछले 12-15 महीनों के दौरान क्रिकेट खेल रहे होते हैं. जबकि टी-20 और वनडे की लिस्ट में उन खिलाडियों को शामिल किया जाता है जो कि पिछले 9 -12 महीनों से खेल रहे होते हैं. अर्थात इन तीनों लिस्टों में 9 से 15 महीनों के दौरान बनाये गए रिकार्ड्स के आधार पर पॉइंट्स दिए जाते हैं.

उदाहरण के तौर पर

पार्थिव पटेल ने 2008 में भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह खो दी थी इस कारण वे 2009 में टेस्ट लिस्ट से गायब हो गए थे, लेकिन उनकी ICC टेस्ट रैंकिंग पुराने रिकार्ड्स के कारण कुछ समय तक बरक़रार रही लेकिन यह रैंकिंग नए रिकार्ड्स नहीं बना पाने के कारण लगातार गिरती रही थी. हालाँकि पार्थिव ने 2016 में टेस्ट टीम में दुबारा वापसी की और उनकी रैंकिंग फिर से ऊपर आनी शुरू हो गयी थी.

इसके उलट यदि कोई खिलाड़ी क्रिकेट के किसी फॉर्मेट से सन्यास ले लेता है तो उसका नाम ICC लिस्ट से हटा दिया जाता है. जैसे महेंद्र सिंह धोनी ने 2014 में टेस्ट क्रिकेट से सन्यास ले लिए था इसलिए उन्हें टेस्ट रैंकिंग से हटा दिया गया था, लेकिन वन डे और T-20 में उनकी रैंकिंग ICC द्वारा बनायीं जाती है. वन डे मैचों में धोनी अभी 21 वें स्थान पर काबिज हैं.

दरअसल जैसे ही कोई खिलाड़ी एक मैच खेलता है उसकी रैंकिंग जारी कर दी जाती है. लेकिन ICC के द्वारा केवल टॉप 100 खिलाडियों के नाम ही पब्लिश किये जाते हैं. इसलिए टॉप 100 में शामिल होने के लिए एक खिलाड़ी को कई मैच खेलने पड़ते हैं.

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बैट्समैन की रैंकिंग में इन बिन्दुओं का ध्यान रखा जाता है;

1. आउट या नॉट आउट (नॉट आउट पारी को बोनस अंक दिया जाता है)

2. खिलाड़ी ने किस टीम या बॉलर के खिलाफ रन बनाये हैं यदि किसी बैट्समैन ने पाकिस्तान या अफ्रीका की टीम जैसे बोलिंग अटैक के सामने रन बनाये हैं तो उसे उसी अनुपात में ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स दिए जाते हैं.

3. कितने रन बनाये हैं अर्थात ज्यादा रन तो ज्यादा बोनस पॉइंट्स

4. किन परिस्तिथियों में रन बनाये हैं. यदि उस समय रन बनाये जब अपनी टीम संकट में थी तो ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स मिलते हैं.

5. यदि दोनों टीमें प्रत्येक पारी में 500 का स्कोर करती हैं, तो कंप्यूटर इसे उच्च स्कोरिंग मैच के रूप में रेट करता है, जिसमें रन बनाना अपेक्षाकृत आसान था, और इसलिए इस मैच में बनाये गये रनों की वैल्यू उस मैच की तुलना में कम होती है जिसमें दोनों ही टीमों ने 150 रन बनाये थे.

यदि कोई खिलाड़ी इन 150 रनों में 100 रन बनाता है तो उसको 500 रनों वाली पारी में 100 रन बनाने वाले खिलाड़ी की तुलना में ज्यादा रेटिंग पॉइंट्स मिलते हैं.

6. यदि किसी खिलाड़ी ने किसी मैच में ज्यादा रन बनाये हैं और उसकी टीम जीत जाती है तो उसको बोनस अंक मिलते हैं. लेकिन बोनस अंक और भी जयादा होंगे यदि जीत किसी मजबूत टीम के खिलाफ मिली है.

बॉलर की रैंकिंग में इन बिन्दुओं का ध्यान रखा जाता है;

1. कितने रन देकर, कितने विकेट लिए?

2. किस बल्लेबाज का विकेट लिया यह भी मायने रखता है. इस समय कोहली वन और टेस्ट में नम्बर एक की रैंकिंग पर हैं इसलिए उनका विकेट जसप्रीत बुमराह के विकेट की तुलना में ज्यादा रेटिंग अंक दिलाएगा गेंदबाज को.

3. यदि किसी वन डे मैच में ऑस्ट्रेलिया टीम ने 350 रन बनाये हैं और भुवनेषर कुमार ने 50 रन देकर तीन विकेट (3-50) लिए और किसी अन्य मैच में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 180 रन बनाये और हार्दिक पंड्या ने 3-50 का स्कोर किया तो भुवनेषर कुमार को ज्यादा रेटिंग अंक मिलेंगे क्योंकि उसने हाई स्कोरिंग मैच में कम रन दिए हैं.

4. किसी मैच में ज्यादा ओवर फेंकने वाले बॉलर को भी क्रेडिट स्कोर मिलता है भले ही उसको विकेट ना मिले हों.

5. यदि कोई बॉलर ज्यादा विकेट लेता है और उसकी टीम जीत जाती है तो उसको बोनस अंक मिलते हैं. अच्छी टीम के खिलाफ जीतने पर ज्यादा अंक मिलते हैं.

रैंकिंग कब अपडेट की जाती हैं?

ICC सामान्य तौर पर प्रत्येक टेस्ट मैच (आमतौर पर 12 घंटे के भीतर) और प्रत्येक एकदिवसीय श्रृंखला के अंत में टेस्ट और एकदिवसीय मैच के बाद रैंकिंग को अपडेट कर देता है.

500 अंकों का क्या मतलब है?

जो खिलाड़ी 500 रेटिंग अंक प्राप्त कर लेता है उसको एक अच्छा खिलाड़ी कहा जा सकता है. हालाँकि जो खिलाड़ी 900 से अधिक अंक प्राप्त कर लेता है तो यह उनकी सर्वोच्च उपलब्धि होती है. जिस खिलाड़ी के 750 से अधिक रेटिंग अंक हो जाते है उसके टॉप 10 प्लेयर लिस्ट में चुने जाने की पूरी संभावना होती है.

विकेट कीपर के लिए कोई रैंकिंग जारी नहीं की जाती है क्योंकि इसका प्रदर्शन बॉलर के प्रदर्शन पर निर्भर करता है कि बॉलर के इसे कितना सपोर्ट किया. इसलिए इसकी रैंकिंग करना कठिन होता है. इसी प्रकार फील्डिंग के लिए भी रेटिंग अंक जारी नहीं किये जा सकते हैं.

इस प्रकार इस लेख के आधार पर यह स्पष्ट है कि ICC द्वारा जारी की जाने वाली रैंकिंग की गणना प्रक्रिया में बहुत ही छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखा जाता है. जैसे कठिन पिच पर अच्छे रन बनाने या अच्छे विकेट लेने से भी अच्छे रेटिंग पॉइंट्स मिलते हैं. उम्मीद है इस लेख को पढ़ने के बाद आपको बहुत बहमूल्य जानकारी मिली होगी.

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