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अंडमान की जारवा जनजाति के बारे में 19 रोचक तथ्य

05-NOV-2018 10:33
jarwa Tribe

जारवा जनजाति, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की 6 आदिवासी जनजातियों में से एक है. इस जनजाति का सम्बन्ध “नेग्रिटो समुदाय” की जनजाति से है. वर्तमान में यह जनजाति मध्य अंडमान के पश्चिमी भाग और दक्षिण अंडमान के इलाके में रहती है.

यह जनजाति आज भी झुण्ड में रहकर शिकार करती और भोजन को इकठ्ठा करती है. जिस जगह पर जारवा जनजाति रहती है उसको 1979 में अधिसूचना के द्वारा ट्राइबल रिज़र्व एरिया घोषित किया गया था.

Andaman Islands location

आइये इस जनजाति के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं;

1. अंडमान की "जारवा जनजाति" हिन्द महासागर के टापुओं पर पिछले 55,000 वर्षों से निवास कर रही है.

2. जारवा जनजाति के लोगों के मूल ओरिजिन अफ्रीका महाद्वीप माना जाता है.

3. "जारवा जनजाति" को विश्व की सबसे पुरानी जनजाति माना जाता है जो अभी भी पाषाण युग में जी रही है.

jarwa tribe andman

3. "जारवा जनजाति" अब विलुप्त होने की कगार पर है जिनकी संख्या अब लगभग 380 तक बची है.

अंडमान में जनजातियों की संख्या (जनगणना 2011 के अनुसार) इस प्रकार है;

जनजाति का नाम

जनसंख्या

 अंडमानी, चरियार,  चारी,  कोरा,  ताबो,  बो,  येरे,  केदे,  बी,  बालावा, बोजिगीयाब, जुवाई,  कोल

44

   जारवा (Jarwa)

380

    निकोबरीज

27168

   ओंगस (Onges)

101

   सेंटीनिलीज (Sentinelese)

15

   शोमपेंस (Shom Pens)

229

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4."जारवा जनजाति" के लोग आज भी धनुष बाण से शिकार करते हैं और इसी से मछलियों और केकड़ों का शिकार करते हैं.

jarwa tribe hunting fish

5. जारवा जनजाति के लोग सूअर का मांस बहुत चाव से खाते हैं. वे समूह बनाकर सूअर का शिकार करते हैं.

6. अंडमान और निकोबार प्रशासन, ने 16.10.2017 की प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इस जनजाति से सम्बंधित तस्वीरों और वीडियो को पोस्ट करना कानूनन अपराध है और इसका उल्लंघन करने पर व्यक्ति को 3 वर्ष की सजा भी हो सकती है.

7. SC & ST (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 2016 के सेक्शन 3(1) में यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति इस जनजाति के लिए आरक्षित क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश करता है, उनकी तस्वीरें खींचता है, उनकी नग्न अवस्था का वीडियो बनाता है तो उसको तीन साल की सजा और 10,000 रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा.

jarwa tribe no entry zone

9. साल 1990 में "जारवा जनजाति" को स्थानीय सरकार ने घर बनाकर रहने की सुविधा दी लेकिन कुछ ही जारवा अपने क्षेत्र से बाहर आये.

10. जारवा जनजाति इलाके से केवल एक अंडमान ट्रंक रोड गुजरती है. जारवा इलाके में जाने के लिए लगातार एक साथ गाड़ियाँ बिना रुके गुजरती है और किसी भी गाड़ी को रुकने की इजाज़त नहीं है. "जारवा जनजाति" वाले इलाकों में पर्यटकों के रुकने पर पाबंदी है.

11. जारवा इलाके में जाते वक्त सेना की गाडियां भी आगे पीछे चलती है क्योंकि जारवा लोग कभी भी पर्यटकों पर अपने भालों, धनुष आदि से आक्रमण कर सकते है.

12. जारवा जनजाति से लोग आज भी बिना कपड़ों के ही रहते है लेकिन हाल ही के सालों में पर्यटकों के संपर्क में आने के कारण बहुत से जारवा अब कुछ कपडे पहने दिख जाते हैं.

13. जारवा जनजाति के लोगों को गाना गाने और नाचने का बहुत शौक है और एक सुर और ताल में ये नाचते गाते हैं और अपने परंपरागत वाद्य यंत्र बजाते हैं.

15. जारवा जनजाति के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा है इसके अलावा इनको जड़ी बूटियों का बहुत अच्छा ज्ञान है जिसके कारण ही वो बिना मेडिकल के ही इतने वर्षो से जंगलों में रह रहे है.

16. जारवा के लोगों का जब से बाहरी लोगो से सम्पर्क हुआ उनमें शराब और पान की लत पड़ गयी.

17. जारवा के जीवन में अनेकों लोगों ने डॉक्युमेंट्री बनाने की कोशिश है. कुछ साल पहले मीडिया में ऐसी ख़बरें आयीं थीं कि विदेशी पर्यटकों ने इन्हें कुछ खाना देने के बदले अपने मनोरंजन के लिए नचवाया था. हालाँकि सरकार ने इस पर कड़ा एक्शन लिए था.

18. इस समुदाय में परंपरा के अनुसार यदि बच्चे की माँ विधवा हो जाए या उसका पिता किसी दूसरे समुदाय का हो तो बच्चे को मार दिया जाता है.

19. बच्चे का रंग थोड़ा भी गोरा हो तो कोई भी उसके पिता को दूसरे समुदाय का मानकर उसकी हत्या कर देता है और समुदाय में इसके लिये कोई दंड नहीं है.

यह जनजाति अभी भी इतनी पुरानी दुनिया में रह रही है कि यदि आजकल के आधुनिक लोग इनसे मिलें तो अचंभित हुए बिना नहीं रह पाएंगे. ये लोग पूरी तरह से प्रकृति की गोद में रह रहे हैं. इन्हें नहीं पता कि टीवी, मोबाइल, हवाई जहाज क्या होता है और इसका क्या उपयोग हो सकता है.

सरकार ने इस जनजाति को बाकी दुनिया से सिर्फ इसलिए अलग कर रखा है कि इनकी संस्कृति ना बिगड़े, अर्थात ये आदिम काल में ही जियें. मेरी अपनी व्यक्तिगत राय यह है कि सरकार जारवा जनजाति को एक संग्रहालय की वस्तु ना समझे और इन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने की कोशिश करे ताकि ये लोग भी जान सकें कि पृथ्वी पर रहने वाला आदमी अब मंगल गृह और चाँद पर बसने की योजना बना रहा है अर्थात आधुनिक दुनिया कितनी आगे बढ़ चुकी है.

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