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भारतीय स्वर्ण युग के प्रसिद्ध नाटककारों की सूची

Shakeel Anwar03-SEP-2018 14:51
List of Famous Dramatists of Theatre in Indian Classical Period HN

भारत में नाट्यकला का आरंभ एक कथात्मक कला विधा के रूप में हुआ, जिसमे संगीत, नृत्य तथा अभिनय के मिश्रण को सम्मिलित कर लिया गया। अनुवाचन, नृत्य तथा संगीत नाट्यकला के अभिनय अंग थे। संस्कृत शब्द 'नाटक' का मूल रूप है- ‘नट’ शब्द जिसका वास्तविक अर्थ होता है – ‘नर्तक’। प्राचीन भारत में नाटक मूलतः दो प्रकार के होते हैं: लोकधर्मी (जिसमे रोजमर्रा के जीवन के वास्तविक चित्रण हो) और नाट्यधर्मी (जिसमे अत्याधिक शैलीगत आख्यान मुखर तथा प्रतीकात्मक  पारम्परिक नाटक हो)।

भारतीय स्वर्ण युग के प्रसिद्ध नाटककार

प्राचीन भारत के सात महान नाटक लेखक थे जिनकी चर्चा नीचे की गयी है:

1. भास

ये संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध नाटककारों में से एक हैं। स्वप्नवासवदत्ता इनके द्वारा लिखी गयी सबसे चर्चित नाटक है जिसमें इन्होने एक राजा-रानी के अविरहनीय प्रेम और पुनर्मिलन की कहानी रूप में बहुत ही खूबसूरती से पेश किया है। उनके अन्य रचनाएँ - प्रतिजन-योगगंधारायण, चारू दत्तम, पंचारात्रल,कर्णभारा दूतवाक्य, बट्ट चरित और अबिभार्की।

2. शूद्रक

ये संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध नाटककारों में से एक हैं। मृच्छकटिकम्, वासवदत्ता और पद्मप्रभृतका इनकी ही रचना है।

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3. विशाखदत्त

ये गुप्तकाल के संस्कृत भाषा के सुप्रसिद्ध नाटककार थे। देवी चन्द्रगुप्तम् (गुप्तवंशी शासक रामगुप्त से सम्बन्धित घटनाओं का उल्लेख मिलता है), राघवानन्द नाटकम् और मुद्राराक्षस (चन्द्रगुप्त मौर्य के जीवन से सम्बन्धित घटनाओं का उल्लेख मिलता है) इनके प्रसिद्ध रचनाएँ है। इनके नाटकों में  वीर रस प्रधान होता हैं।

4. कालिदास

ये संस्कृत भाषा के महान कवियों और नाटककारों में से एक हैं। इन्होने भारत की पौराणिक कथाओं और दर्शन के आधार पर बहुत सारी नाटक और काव्य की रचना की थी। इनके प्रसिद्ध रचनाएँ: अभिज्ञान शाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम् और मालविकाग्निमित्रम्; दो महाकाव्य: रघुवंशम् और कुमारसंभवम्; और दो खण्डकाव्य: मेघदूतम् और ऋतुसंहार। 

5. भवभूति

ये संस्कृत भाषा के महान कवियों और नाटककारों में से एक हैं। इनके प्रसिद्ध रचनाएँ:

ये संस्कृत के महान कवियों एवं सर्वश्रेष्ठ नाटककारों में से एक हैं। इनके प्रसिद्ध रचनाएँ: महावीरचरितम् (रामायण के रावण–वध से लेकर राम के राजतिलक तक की मुख्य घटनाएँ सात अंको में वर्णित हैं), उत्तररामचरितम् (राम कथा, उनके राजतिलक से लेकर सीता वनवास और अंत में दोनों के अंतिम मिलन तक की कथा हैं) और मालतीमाधव

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6. हर्षवर्धन

ये प्राचीन भारत के एक प्रतिष्ठित नाटककार एवं कवि थे। इनके प्रसिद्ध रचनाएँ:  'नागानन्द', 'रत्नावली' एवं 'प्रियदर्शिका' बाणभट्ट, हरिदत्त एवं जयसेन इनके दरबारी कवि एवं लेखक थे।

7. महेंद्र वर्मन

यह पल्लव राजवंश का प्रसिद्ध शासक था। इसके शासन कल में राजनीतिक दृष्टि, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कलात्मक दृष्टि से पल्लव साम्राज्य चरमोत्कर्ष पर था। इनके प्रसिद्ध रचनाएँ: 'मत्तविलास प्रहसन' तथा 'भगवदज्जुकीयम'

साधारण शब्दों में कहा जा सकता है की नाटक विधा साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यही एक ऐसी विधा है जिसे जनता अपने समक्ष घटित होते देख सकती है और अनुभव कर सकती है।

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