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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम क्या है और इसके क्या फायदे हैं?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम, सोने में निवेश करने की स्कीम है जिसे भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाता है. इस योजना का मुख्य उद्येश्य सोने की फिजिकल मांग को कम करना है ताकि भारत के सोने के आयात को कम किया जा सके.
Aug 4, 2020 15:56 IST
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Sovereign Gold Bond Scheme
Sovereign Gold Bond Scheme

भारत, दुनिया में सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है जो कि मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करता है.भारत, हर वर्ष लगभग 800 से 900 टन स्वर्ण का आयात करता है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सोने का आयात, जिसका देश के चालू खाते के घाटे (CAD) पर असर पड़ता है, 2019-20 के दौरान 14.23% गिरकर 28.2 बिलियन डॉलर हो गया. वर्ष 2018-19 में इस पीली धातु का आयात 32.91 अरब डॉलर रहा था.

ये आंकड़े बताते हैं कि भारत सरकार बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा सिर्फ सोने के आयात पर खर्च करती है इसलिए सरकार ने 'सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड' जैसी योजना को शुरू किया है,ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके.

'सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम क्या है?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम सोने में निवेश करने की गोल्ड बांड योजना है जिसे भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाता है. इस योजना का मुख्य उद्येश्य सोने की फिजिकल मांग को कम करना है ताकि भारत के सोने के आयात को कम किया जा सके. इस योजना में निवेशक को गोल्ड बांड जारी किया जाता है और बांडों को परिपक्वता अवधि बाद नकदी में भुनाया जा सकता है.

सॉवेरेन गोल्ड बॉन्ड्स को रुपयों से भी खरीदा जा सकता है और गोल्ड के विभिन्न ग्रामों में मूल्यांकित होंगे. बॉन्ड में न्यूनतम निवेश 1 ग्राम से किया जाएगा जबकि एक व्यक्ति के लिए  निवेश की ऊपरी सीमा4 किलोग्राम  पर तय (कैप) की गयी है. 

भारत सरकार द्वारा नवम्बर 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड इशू किए गए थे.

गोल्ड बांड में कौन निवेश कर सकता है?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में वह व्यक्ति निवेश कर सकता है जो कि भारत में निवास करता हो, वह अपने स्वयं के लिए, किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से बॉण्ड धारक हो सकता है या फिर नाबालिग की ओर से भी इस गोल्ड बांड को खरीद सकता है.

ध्यान रहे कि भारत में निवास करने वाले व्यक्ति को विदेशी मुद्रा प्रबंधन, अधिनियम, 1999 की धारा 2(यू) के साथ पठित धारा 2(वी) के तहत परिभाषित किया गया है. इसमें बांड धारक के रूप में विश्वविद्यालय,धर्मार्थ संस्थान या कोई ट्रस्ट भी हो सकता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने के फायदे:-

1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का उपयोग क़र्ज़ लेने के लिये कोलैटरल के रुप में किया जा सकता है.

2. इन बॉन्ड्स को एक्स्चेन्जों में ट्रेड किया जा सकता है ताकि इन्वेस्टर्स समय से पहले भी अगर चाहें तो एग्ज़िट कर सकते हैं.

3. सोने की वह मात्रा जिसके लिए निवेशक भुगतान करता है उसका मूल्य सुरक्षित रहता है क्योंकि निवेशक को भुगतान, सोने के वर्तमान मूल्य के हिसाब या परिपक्वता अवधि के समय चल रहे मूल्य के हिसाब से किया जाता है.

4. ये बांड रिज़र्व द्वारा जारी किये जाते हैं इसलिए निवेशक इस रिस्क से बच सकते हैं कि बांड इशू करने वाली कंपनी दिवालिया या भाग ना जाए.

5. ये सोने के चोरी हो जाने के डर से भी मुक्ति प्रदान करते हैं.

6. सोने के आभूषण बनवाने के समय मेकिंग चार्ज लिया जाता है और सोने की शुद्धता की भी चिंता रहती है. इन बांड्स से ये समस्या भी दूर हो गयी है.

7. इसमें सोने की कीमतों में इजाफे के अलावा भी निवेशक को 2.5% की दर से अतिरिक्त ब्याज भी मिलता है.

8. इसमें किया गया निवेश, मेच्योरिटी पर यह टैक्स फ्री होता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की पांचवीं सीरीज खुली:-

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की पांचवीं सीरीज 3 अगस्त से लेकर 7 अगस्त तक यह निवेशकों के लिए खुल गयी है. इस बार सरकार ने गोल्ड बांड के लिए इश्यू प्राइस 5,334 रुपये प्रति ग्राम अर्थात 53,340 रुपये प्रति 10 ग्राम तय किया है. ऑनलाइन गोल्ड बांड खरीदने वालों के लिए हर ग्राम पर 50 रुपये की छूट भी मिलेगी. अतः ऑनलाइन इन्वेस्टर्स के लिए इश्यू प्राइस 52,840 रूपये प्रति 10 ग्राम होगा. 

उम्मीद है कि अब आप इस लेख को पढ़कर समझ गए होंगे कि सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम क्यों शुरू की थी और इस स्कीम में निवेश करने से निवेशकों को क्या फायदे होते हैं?

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