जानें संसद सदस्यों के क्या विशेषाधिकार होते हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 में दो में विशेषाधिकार बताये गये हैं ये हैं; 1.संसद में भाषण देने की स्वतंत्रता तथा 2. सदन की कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार. संसदीय विशेषाधिकार, कुछ विशेष अधिकार और रियायतें हैं जो कि संसद के दोनों सदनों के सदस्यों और संसद की समितियों में भाग लेने वाले लोगों को मिलतीं हैं.
Created On: Dec 20, 2018 16:34 IST
Indian Parliament
Indian Parliament

भारत को पूरी दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहा जाता है. यहाँ कानून बनाने की शक्ति संसद के पास मौजूद है और इस संसद के तीन भाग होते हैं जिन्हें राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्य सभा कहा जाता है. इस लेख में हम आपको यह बता रहे हैं कि एक संसद सदस्य के पास कौन से संसदीय विशेषाधिकार होते हैं.

भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 में दो में विशेषाधिकार बताये गये हैं ये हैं; 1.संसद में भाषण देने की स्वतंत्रता तथा 2. सदन की कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार.

भारत के संविधान में संसदीय विशेषाधिकार का कांसेप्ट ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है. इन विशेषाधिकारों का मुख्य मकसद संसद और उसके सदस्यों के पद की सर्वोच्चता को बरक़रार रखना है.

10 ऐसे विशेष कानून जो सिर्फ जम्मू और कश्मीर पर ही लागू होते हैं?

संसदीय विशेषाधिकार क्या होते हैं?

संसदीय विशेषाधिकार, कुछ विशेष अधिकार और रियायतें हैं जो कि संसद के दोनों सदनों के सदस्यों और संसद की समितियों में भाग लेने वाले लोगों को मिलतीं हैं.

किन्हें मिलते हैं संसदीय विशेषाधिकार

यह अधिकार मुख्य रूप से संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को मिलते हैं. इसके अलावा ये अधिकार उन व्यक्तियों को भी दिए जाते हैं जो कि संसद की किसी भी समिति में बोलते और हिस्सा लेते हैं इसमें भारत के महान्यायवादी तथा केन्द्रीय मंत्री शामिल होते हैं.

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि राष्ट्रपति भले ही संसद का हिस्सा होता है लेकिन उसके पास संसदीय विशेषाधिकार नहीं होते हैं.

संसदीय विशेषाधिकारों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है;

A. संसद के सदस्य सामूहिक रूप से प्राप्त करते हैं

B. संसद सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपयोग करते हैं

संसद सदस्यों के सामूहिक विशेषाधिकार इस प्रकार हैं;

1.सदन में पीठासीन अधिकारी की अनुमति के बिना कोई व्यक्ति (सदस्य या बाहरी) बंदी नहीं बनाया जा सकता है और ना ही कोई कानूनी (सिविल या आपराधिक) कार्यवाही की जा सकती है.

2. किसी न्यायालय को सदन या इसकी किसी समिति की कार्यवाही की जाँच करने का अधिकार नहीं है.

3. संसद अपनी कार्यवाही से अतिथियों को बाहर कर सकती है और राष्ट्रहित के कुछ मामलों में गुप्त बैठक भी कर सकती है.

4. ससंद के दोनों सदनों के विशेषाधिकारों के उल्लंघन, सदन का अनादर करने के मामले में संसद सदस्य और बाहरी लोगों को चेतावनी और दंड भी दिया जा सकता है.यदि व्यक्ति सदन का सदस्य है तो उसे सदन से बर्खास्त भी किया का सकता है.

व्यक्तिगत विशेषाधिकार इस प्रकार हैं;

1. जब संसद का सत्र चल रहा हो उस समय, संसद सदस्य या विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति किसी न्यायालय में लंबित मामले में उपस्थित होने या कोई प्रमाण प्रस्तुत करने से मना कर सकता है.

2.  संसद सदस्य को संसद की कार्यवाही के दौरान, कार्यवाही चलने से 40 दिन पूर्व और कार्यवाही बंद होने के 40 दिन बाद तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.यह अधिकार केवल सिविल मामलों में उपलब्ध है ना कि आपराधिक मामलों में.

parliament in session

3. यदि कोई संसद सदस्य सदन या किसी समिति के सामने कोई बात कहता है तो इसके लिए उसके ऊपर किसी न्यायालय में कार्यवाही नहीं की जा सकती है. इसके अलावा उसे सदन में भाषण देने का भी अधिकार है.

संसदीय विशेषाधिकारों का हनन किसे कहते हैं;

यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी किसी संसद सदस्य के व्यक्तिगत या सामूहिक विशेषाधिकार का हनन जैसे उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल, हमला करना इत्यादि, तो इस तरह के कृत्य संसदीय विशेषाधिकारों का हनन माने जाते हैं.

इस प्रकार ऊपर दिए गए तथ्यों से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत में संसदीय विशेषाधिकारों को इसलिए शामिल किया गया है ताकि देश में संसद के प्रति सम्मान और जनता के द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधियों की इज्ज़त में इजाफा हो सके. लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि चुनाव जीत जाने के बाद ये प्रतिनिधि ही जनता की इज्जत नहीं करते हैं लेकिन जनता से उम्मीद करते हैं कि वो इनकी इज्ज़त करे.

इसके अलावा आपने देखा होगा कि संसद सदस्य कई बार अधिकारियों और जनता से बदतमीजी करते हुए भी नजर आते हैं. इसे संसदीय विशेषाधिकारों का दुरूपयोग कहा जाता है. इसलिए समय की मांग यह है कि यदि ‘जनता का शासन जनता के लिए’ वाली कहावत को चरितार्थ करना है तो इन संसदीय विशेषाधिकारों में फेरबदल की सख्त जरूरत है.

जानिये देश में आपातकाल कब और क्यों लगाया गया था?

भारत की अदालतों में गवाह को कसम क्यों खिलाई जाती है?

Get the latest General Knowledge and Current Affairs from all over India and world for all competitive exams.
Comment (0)

Post Comment

4 + 9 =
Post
Disclaimer: Comments will be moderated by Jagranjosh editorial team. Comments that are abusive, personal, incendiary or irrelevant will not be published. Please use a genuine email ID and provide your name, to avoid rejection.