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जानें पटाखों से निकलने वाली रोशनी और आवाज का कारण क्या है

दीपावली का त्यौहार आने वाला है. हम से से बहुत से लोग अलग-अलग किस्म के पटाखे, फुलझड़ियाँ और अनार जलाएंगे. जिनसे अलग अलग तरह की आवाज, रोशनी निकलती है.  लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रॉकेट हवा में इतनी ऊंचाई तय करके ही क्यों फटता है? बम में इतनी आवाज क्यों होती हैं और अनार से अलग अलग तरह की रोशनी क्यों निकलती है? आइये इन प्रश्नों के उत्तर इस लेख में जानते हैं. 
Oct 16, 2019 11:41 IST
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दीपावली पटाखों, अनारों, फुलझड़ियों और ढेरों मिठाइयों का त्यौहार है. हम से से शायद ही कोई होगा जो कि अपने बचपन में दीवाली पर पटाखों, बमों, अनारों, फुलझड़ियों का आनदं ना उठाया हो. आइये इनके बारे में और जानते हैं.

पटाखों के प्रकार

मुख्य रूप से पटाखे दो प्रकार के होते हैं- (i) आवाज वाले पटाखे (ii) हवा में फूटने वाले पटाखे
(i) आवाज वाले पटाखे: ये वो पटाखे होते हैं जिन्हें जलाने पर धमाके की आवाज होती है. आवाज वाले पटाखों के निर्माण में तीन तरह के रॉ मैटेरियल अर्थात पोटेशियम नाइट्रेट, एलुमिनियम पाउडर और सल्फर की जरूरत होती है. इसके अलावा पटाखे का कागज और अन्य सामग्री की भी जरुरत होती है.
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Image source: Sri Kaliswari Fireworks Private Limited
(ii) हवा में फूटने वाले पटाखे: ये वो पटाखे होते हैं जो ऊपर जाकर फटते हैं. जैसे रॉकेट और तरह-तरह के स्काई शॉट्स. इन पटाखों में बारूद डाला जाता है, जिससे इनको एक झटका लगता है और ये हवा में उड़ जाते हैं.
Diwali Rocket
Image source: தமிழ் புத்தக களஞ்சியம்
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पटाखों से निकलने वाली अलग-अलग किस्म की रोशनी का कारण

अक्सर हम देखते हैं कि विभिन्न प्रकार के पटाखे फटने के बाद आसमान में रंगबिरंगी रोशनी बिखेरते हैं. इन पटाखों में रोशनी प्राप्त करने के लिए खास तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है. अलग-अलग रसायनों के हिसाब से ही पटाखों के रंगों की रोशनी अलग-अलग होती है.
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Image source: YouTube

किस रोशनी के लिए डाला जाता है कौन सा रसायन

रसायन विज्ञान में मौजूद तरह-तरह के रसायनों को यदि किसी और वस्तु के साथ मिलाया जाए तो वह रसायनिक तत्व उसके साथ मिश्रित होने पर अपना रंग बदल लेता है.

हरे रंग के लिए बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल

पटाखों से हरे रंग की रोशनी निकालने के लिए उसमें बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है. बेरियम नाइट्रेट को अनकार्बनिक रसायन भी कहा जाता है. यह विस्फोटक पदार्थ का काम करता है. बारूद में मिश्रण होने पर यह अपना रंग बदलता है और हरे रंग में बदल जाता है. बेरियम नाइट्रेट के हरे रंग में बदलने के कारण जब पटाखे में आग लगाई जाती है तो उसमें से हरे रंग की ही रोशनी निकलती है. इसका इस्तेमाल ज्यादातर आतिशबाजी एवं अनार में किया जाता है.

लाल रंग के लिए सीजियम नाइट्रेट का इस्तेमाल

पटाखों से लाल रंग की रोशनी निकालने के लिए उसमें सीजियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है. सीजियम नाइट्रेट को बारूद के साथ मिलाने पर इसका रंग लाल हो जाता है. इसके बाद मिश्रण को ठोस बनाकर पटाखे में भरा जाता है और आग लगाने पर इसमें से लाल रंग की रोशनी बाहर आती है. इसका इस्तेमाल ज्यादातर अनार और रॉकेट में किया जाता है.

पीले रंग के लिए सोडियम नाइट्रेट का इस्तेमाल

सोडियम नाइट्रेट का रंग देखने में ही हल्का पीला नजर आता है. पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बारूद के साथ इसे मिलाकर एक ठोस पदार्थ तैयार किया जाता है. इसमें नाइट्रेट की मात्रा बढ़ाई जाती है, जिससे इसका रंग और भी गाढ़ा पीला हो जाता है. यही वजह है कि आग लगाने के बाद यह पीले रंग की रोशनी छोड़ता है. इसका इस्तेमाल अमूमन हर पटाखे में होता है, लेकिन चकरी में इसका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है.
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पटाखे बनाते समय बरती जाने वाली सावधानियां

1. रोशनी के लिए बिजली के इस्तेमाल पर पाबंदी

जो भी कंपनी पटाखे बनाने की फैक्ट्री लगाती है, उसे कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होता है. इसमें सबसे पहला दिशा-निर्देश यह है कि जहां पटाखे बनाए जाते हैं, वहां पर बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जाता है. बिजली होने से शार्ट सर्किट होने का डर होता है, जिससे दुर्घटना होने की संभावना हमेशा बनी रहती है. बिजली का कनेक्शन केवल कंपनी के दफ्तर तक ही होता है, जो पटाखे बनाने वाली फैक्ट्री से थोड़ी दूर पर स्थित होता है.

2. दोनों तरफ से खुले शेड में बनते हैं पटाखे

पटाखे बनाने के लिए दोनों तरफ से खुले हुए शेड बनाए जाते हैं. इस तरह के शेड बनाने का उद्देश्य यह होता है कि पटाखे बनाने के लिए पर्याप्त रोशनी मिल सके, क्योंकि दिशा-निर्देशों के तहत जहां पटाखे बनाए जाते हैं, वहां पर बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जाता है. शेड को दोनों तरफ से इसलिए भी खुला रखा जाता है, ताकि कोई दुर्घटना होने पर आसानी से शेड से बाहर निकला जा सके, जिनसे किसी व्यक्ति की जान को खतरा न हो.
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Image source: thehindubusinessline.com

3. पटाखों का निर्माण कई चरणों में किया जाता है

पटाखों का निर्माण कई चरणों में पूरा किया जाता है ताकि यदि किसी एक स्थान पर कोई दुर्घटना हो तो कारोबारी को कम से कम नुकसान हो.

भारत में पटाखों का सबसे बड़ा निर्माणस्थल

भारत में सबसे अधिक पटाखों का निर्माण तमिलनाडु के शिवकाशी में होता है. शिवकाशी में सबसे अधिक पटाखे बनाए जाने का मुख्य कारण वहां का मौसम है. पटाखे बनाने के लिए शुष्क मौसम की जरूरत होती है, क्योंकि नमी की वजह पटाखों में सीलन आ जाती है. शिवकाशी का मौसम देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा थोड़ा अलग है.

वहां दीपावली से पहले बारिश नहीं होती है, जिस कारण शिवकाशी और उसके आसपास के हिस्सों में मौसम सूखा रहता है और इसी दौरान पटाखे बनाए जाते हैं. दीपावली तक उत्तरी-पूर्वी मानसून शिवकाशी और उसके आसपास के हिस्सों में पहुंचता है, लेकिन तब तक वहां से पटाखे पूरे देश में भेजे जा चुके होते हैं.
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