Search

क्या आप विभिन्न कृषि-पद्धतियों और तकनीकों के बारे में जानते हैं

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इस लेख में हमने विभिन्य कृषि-पद्धतियों और तकनीकों पर कुछ तथ्य दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
May 11, 2018 15:26 IST
Typology of Agricultural Practices and Techniques in Hindi

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। विश्व में प्रमुख 9 कृषि-पद्धतिय और तकनीक है जिसकी चर्चा नीचे की गयी हैं:

1. परती ज़मीन (Fallow land)

निरंतर खेती के कारण मिट्टी अपनी उर्वरता खो देती है। इसलिए, उसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए भूमि पर कुछ समय के लिए खेती नहीं की जाती है, ताकि वह अपनी प्राकृतिक उर्वरता प्राप्त कर सके।

2. फसल का चक्रिकरण (Crop Rotation)

इस पद्धति में, भूमि की उर्वरता बनाये रखने के लिए, इस तरह से खेती की जाती है जिसमे एक के बाद एक ऐसे फसलो की खेती की जाती है ताकि मिट्टी की उर्वरता बरक़रार रहे। दुसरे शब्दों में कहे तो, एक ही खेत में विभिन्न फसलों को बारी-बारी से (अदला-बदली से) बोना (फसल-चक्रण)।

3. मिश्रित कृषि (Mixed Cropping)

इस पद्धति में, दो या तीन फसलों को एक कृषि भूमि पर एक साथ उगाया जाता है ताकि एक फसल द्वारा उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की भरपाई कुछ हद तक अन्य फसलों कर सके। मिश्रित फसलों का अनुपात लागू विधियों और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार भिन्न होता है। मिश्रित फसलें एक तरफ जहां किसान की खाद्य सुरक्षा व पोषकता को बढ़ाती है, वहीं अलग-अलग जड़ व प्रकृति की होने के कारण मृदा उर्वरता व नमी को संरक्षित करने में भी सहायक होती हैं।

4. द्वीत फसल कृषि (Two-Cropping Agriculture)

इस पद्धति में, एक वर्ष में एक के बाद एक दो फसलों की खेती की जाती है। यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहां पर्याप्त वर्षा या सिंचाई की उचित सुविधा होती है। इस कृषि में दूसरी फसल आमतौर पर, नाइट्रोजन फिक्सिंग वाले फसलों की खेती होती है।

5. बहु-कृषि (Multi-cropping Agriculture)

कृषि की इस पद्धति में तीन फसलों की खेती एक वर्ष में की जाती है तथा उन क्षेत्रो में प्रचलित होती है जहां फसलों की प्रारंभिक परिपक्व किस्म और बेहतर जल प्रबंधन तकनीकों की उपलब्धता होती है।

पारंपरिक कृषि और पर्यावरण पर इसके प्रभाव

 6. रिले कृषि (Relay Cropping)

फसल के पकने और काटने से पहले जब नई फसल की खेती की जाती है, इसे रिले कृषि के रूप में जाना जाता है।

7. फसल-उत्पादकता (Crop-Productivity)

यह प्रति हेक्टेयर या प्रति व्यक्ति फसल के उत्पादन को संदर्भित करता है। व्यापक कृषि के क्षेत्रों में, प्रति व्यक्ति उत्पादकता उच्च होती है जबकि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता गहन कृषि के क्षेत्रों में उच्च होती है।

8. कृषि दक्षता (Agricultural Efficiency)

वह ऐसे कृषि से संबंधित है, जो न्यूनतम समय में अधिकतम मात्रा में कृषि उत्पादन की बात करता है जिसे कृषि उत्पाद को किसान अपने अनुसार बेच सके।

9. फसल सघनता (Crop Intensity)

भारत जैसे देशों में कृषि भूमि का विस्तार नहीं किया जा सकता है। इसलिए, एक वर्ष में भूमि से एक से अधिक फसल प्राप्त करना आवश्यक है। भूमि के इष्टतम कृषि उपयोग को फसल सघनता कहा जाता है।

विश्व भर में प्रचलित कृषि प्रणालियों पर संक्षिप्त विवरण

Loading...