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भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से संबंधित कुछ अनजाने तथ्य

13-AUG-2018 18:23
Unknown facts about Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru

शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने भारत को आजाद होने में मुख्य भूमिका निभाई थी. इनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है. इनको 23 मार्च 1931 की रात को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की देशभक्ति को अपराध की संज्ञा देकर अंग्रेजों द्वारा फाँसी पर लटका दिया गया था. क्या आप जानते हैं कि इनको तय दिन और समय से 11 घंटे पहले ही फांसी पर चढ़ा दिया गया था. इस दिन को हर वर्ष शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं. इस लेख में हम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की शहादत को याद करते हुए उनसे जुड़े कुछ अनजाने तथ्यों का विवरण दे रहे हैं.

भगतसिंह

 bhagat singh
Image source: NewsRead.in  
1. 8 वर्ष की छोटी उम्र में ही वह भारत की आजादी के बारे में सोचने लगे थे और 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया थाl

2. भगत सिंह के माता-पिता ने जब उनकी शादी करवानी चाही तो वह कानपुर चले गए थेl उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि “अगर गुलाम भारत में मेरी शादी होगी तो मेरी दुल्हन मौत होगीl” इसके बाद वह “हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन” में शामिल हो गए थेl

3. भगत सिंह ने अंग्रेजों से कहा था कि “फांसी के बदले मुझे गोली मार देनी चाहिए” लेकिन अंग्रेजों ने इसे नहीं माना। इसका उल्लेख उन्होंने अपने अंतिम पत्र में किया हैl इस पत्र में भगत सिंह ने लिखा था, चूंकि “मुझे युद्ध के दौरान गिरफ्तार किया गया है। इसलिए मेरे लिए फाँसी की सजा नहीं हो सकती हैl मुझे एक तोप के मुंह में डालकर उड़ा दिया जायl“

4. भगत सिंह ने जेल में 116 दिनों तक उपवास किया थाl आश्चर्य की बात यह है कि इस दौरान वे अपने सभी काम नियमित रूप से करते थे, जैसे- गायन, किताबें पढ़ना, लेखन, प्रतिदिन कोर्ट आना, इत्यादि।

5. ऐसा कहा जाता है कि भगत सिंह मुस्कुराते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए थे। वास्तव में निडरता के साथ किया गया उनका यह अंतिम कार्य "ब्रिटिश साम्राज्यवाद को नीचा” दिखाना था।

6. ऐसा कहा जाता है कि कोई भी मजिस्ट्रेट भगत सिंह की फांसी की निगरानी करने के लिए तैयार नहीं था।  मूल मृत्यु वारंट की समय सीमा समाप्त होने के बाद एक मानद न्यायाधीश ने फांसी के आदेश पर दस्तखत किया और उसका निरीक्षण किया।

7. जब उसकी मां जेल में उनसे मिलने आई थी तो भगत सिंह जोरों से हँस पड़े थेl यह देखकर जेल के अधिकारी भौचक्के रह गए कि यह कैसा व्यक्ति है जो मौत के इतने करीब होने के बावजूद खुले दिल से हँस  रहा हैl

सुखदेव

 sukh dev
Image source:YouTube

1. सुखदेव फंसी की सजा मिलने पर डरने की बजाय खुश थेl फांसी से कुछ दिन पहले महात्मा गांधी को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा था कि "लाहौर षडयंत्र मामले के तीन कैदी को मौत की सजा सुनाई गई है और उन्होंने देश में सबसे अधिक लोकप्रियता प्राप्त की है जो अब तक किसी क्रांतिकारी पार्टी को प्राप्त नहीं है। वास्तव में, देश को उनके वक्तव्यों से बदलाव के रूप में उतना लाभ नहीं मिलेगा जितना लाभ उन्हें फांसी देने से प्राप्त होगाl

2. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सुखदेव ने ही भगत सिंह को असेम्बली हॉल में बम फेंकने के लिए राजी किया थाl वास्तव में “हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन “ द्वारा असेम्बली हॉल में बम फेंकने के लिए बटुकेश्वर दत्त के साथ किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त किया गया थाl लेकिन सुखदेव द्वारा भगत सिंह को कायर एवं डरपोक कहने के बाद भगतसिंह ने खुद असेम्बली हॉल में बम फेंकने का निर्णय लियाl  

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3. सुखदेव अपने बचपन के दिनों से ही काफी अनुशासनात्मक और कठोर थेl स्कूल के दिनों में भी जब एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी को सलामी न करने के कारण उन्हें छड़ी से पीटा गया तो उन्होंने उफ तक नहीं कीl उन्होंने सैन्य अधिकारी द्वारा दी गई सजा को धीरज के साथ सहन किया और अपने हाथ पर “मारखाना” खुदवाया था जिसका मतलब है कि वह दूसरों द्वारा पीटे जाने के लिए ही पैदा हुए हैं।

इसके अलावा एक बार सुखदेव ने अपने बाएं हाथ पर छपे "ओम" के टैटू को निकलने के लिए उस नाइट्रिक अम्ल डाल दिया था और उस घाव को मोमबत्ती की लौ के सामने रख दिया थाl यह उनके सहनशक्ति का द्दयोतक हैl

 

राजगुरू

raj guru

Image source:Scoopnest.com

1. राजगुरू का पूरा नाम शिवराम हरी राजगुरू था और उनका जन्म पुणे के निकट खेड़ में हुआ थाl

2. शिवराम हरि राजगुरू बहुत ही कम उम्र में वाराणसी आ गए थे जहां उन्होंने संस्कृत और हिंदू धार्मिक शास्त्रों का अध्ययन किया थाl वाराणसी में ही वह भारतीय क्रांतिकारियों के साथ संपर्क में आए। स्वभाव से उत्साही राजगुरू स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने के लिए इस आंदोलन में शामिल हुए और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी (HSRA) के सक्रिय सदस्य बन गएl

3. राजगुरू महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए अहिंसक सिविल अवज्ञा आंदोलन में विश्वास नहीं करते थेl उनका मानना था कि उत्पीड़न के खिलाफ क्रूरता ब्रिटिश शासन के खिलाफ अधिक प्रभावी था, इसलिए वह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी में शामिल हुए थे, जिनका लक्ष्य भारत को किसी भी आवश्यक माध्यम से ब्रिटिश शासन से मुक्त करना थाl उन्होंने भारत की जनता को अंग्रेजों के क्रूर अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए इच्छुक नवयुवकों को इस क्रांतिकारी संगठन के साथ हाथ मिलाने का आग्रह कियाl

4. राजगुरू शिवाजी और उनकी गुरिल्ला युद्ध पद्धति से काफी प्रभावित थेl

5. इस महान स्वतंत्रता सेनानी के जन्मस्थान खेड़ का नाम बदलकर उनके सम्मान में राजगुरूनगर कर दिया गया हैl हरियाणा के हिसार में भी उनके नाम पर एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का नाम रखा गया है।

6. राजगुरू को उनकी निडरता और अजेय साहस के लिए जाना जाता था। उन्हें भगत सिंह की पार्टी के लोग “गनमैन” के नाम से पुकारते थेl

वर्तमान में स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों को क्या सुविधाएँ मिलती है?

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