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वर्तमान में स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों को क्या सुविधाएँ मिलती है?

Hemant Singh13-AUG-2018 11:15
स्वतंत्रता सेनानी

भारत में स्वतंत्रता सेनानियों और उनके पात्र आश्रितों को सम्मानित करने के लिए आजादी के रजत जयंती वर्ष-1972 में एक केंद्रीय योजना को शुरू किया गया था. वर्ष 1980 में, इस योजना को और विस्तृत बनाया गया और इसका नाम बदलकर "स्वतंत्र सैनिक सम्मान पेंशन योजना" रख दिया गया.
वर्तमान में इसका नाम "स्वतंत्र सैनिक सम्मान योजना" है. गृह मंत्रलाय की वेबसाइट के अनुसार, अगस्त 2018 तक कुल 13,013 स्वतंत्रता सेनानियों और 24,445 स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को सरकार से पेंशन मिल रही है. इस प्रकार अभी कुल 37,458 लोग "स्वतंत्र सैनिक सम्मान योजना" के तहत पेंशन और नौकरियों में आरक्षण का लाभ ले रहे हैं. आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल दोनों में 4937 पेंशनभोगी है जबकि महाराष्ट्र में 4738 पेंशनभोगी हैं.

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नोट: यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि स्वतंत्रता सेनानी कोटे के अंतर्गत आरक्षण का फायदा सिर्फ तीसरी पीढ़ी तक ही मिलता है अर्थात स्वतंत्रता सेनानी के लड़के/लड़कियों और पोता/पोतियों को ही इसका लाभ मिल सकता है. स्वतंत्रता सेनानी कोटे का प्रमाण पात्र प्राप्त करने के लिए गृह मंत्रालय से कांटेक्ट करना चाहिए.


इस योजना के तहत पेंशन उन्ही आश्रितों को मिलेगी जिनके पूर्वजों ने निम्न आन्दोलनों/विद्रोहों में भाग लिया था:
1. 1943 में भारत छोड़ो आंदोलन और अम्बाला कैंट के दौरान ‘स्वेज नहर सेना विद्रोह’
2. झांसी रेजिमेंट केस (1940)
3. आईएनए में झांसी रानी रेजिमेंट और आजाद हिंद फ़ौज  

 

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Image source:ScoopWhoop
4. 1940 में कलकत्ता में नेताजी सुभाष बोस द्वारा आयोजित हॉलवेल विद्रोह आंदोलन
5. रॉयल भारतीय नौसेना विद्रोह, 1946
6. खिलाफत आंदोलन (1919)
7. हर्ष चीन मोर्चा (1946-47)
8. मोपला विद्रोह (1921-22)
9. हैदराबाद राज्य में आर्य समाज आंदोलन (1938-39)
10. मदुरई षडयंत्र केस (1945-47)
11. ग़दर पार्टी मूवमेंट (1913)
12. गुरुद्वारा सुधार आंदोलन (1925-25) जिसमे निम्न विद्रोह शामिल है: -
i. तरन-तारन मोर्चा
ii. नैनकाना त्रासदी फरवरी (1920)
iii. स्वर्ण मंदिर के मामलों (मोर्चा चाबियन साहेब)
iv. गुरु का बाग मोर्चा
v.  बाबर अकाली आंदोलन
vi. जैतो मोर्चा
vii. भाई फेरु मोर्चा; तथा
viii. सिख षडयंत्र (स्वर्ण मंदिर) 1924
13. प्रजा मंडल आंदोलन (1939-94)
14. कीर्ति किसान आंदोलन (1927)
15. नवजवान सभा (1926-31)
16. दांडी मार्च (1930)
17. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

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18. भारतीय राष्ट्रीय सेना (1942 से 1946)
19. भारत में फ्रांसीसी और पुर्तगाल शासन का भारत में विलय आंदोलन
20. पेशावर काण्ड -1930 (जिसमे गढ़वाल राइफल्स के सदस्यों ने भाग लिया था)
21. चौरा चौरी कंड (1922)
22. जलियांवाला बाग नरसंहार, (1919)
23. कर्नाटक का अरन्या सत्याग्रह (1939-40)
24. गोवा लिबरेशन मूवमेंट
25. कलीपट्टणम आंदोलन (1941-42)
26. कल्लाड़ा-पांगोड मामला
27. कडककल दंगा प्रकरण
28. कयूर आंदोलन
29. मोराजा आंदोलन
30. मालाबार विशेष पुलिस स्ट्राइक
31. दादरा नगर हवेली आंदोलन
32. गोवा लिबरेशन मूवमेंट, चरण द्वितीय
33. कूका नामधारी आंदोलन, (1871)
पेंशन का कौन पात्र है?
जो भी आश्रित इस योजना के तहत पेंशन के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करना होगा.स्वतंत्रता सेनानियों की निम्न केटेगरी बनायीं गयीं हैं. इस सम्मान के पात्र वही आश्रित लोग होंगे जिनके पूर्वज निम्न श्रेणियों में आते हों:
1. शहीदों के आश्रित सम्बन्धी.
2. व्यक्ति जिसने आजादी के संघर्ष में भाग लेने के कारण छह महीने की न्यूनतम कारावास का सामना किया था.
3. व्यक्ति जो, स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भागीदारी के कारण छह महीने से अधिक समय तक भूमिगत रहे.
4. व्यक्ति, जो स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण, अपने घर में या 6 महीने की न्यूनतम अवधि के लिए अपने जिले से बाहर निकाल दिए गए हों.
5. जिस व्यक्ति की संपत्ति स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी के कारण जब्त या बेचीं गयी थी.
6. व्यक्ति जो, स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण, फायरिंग या लाठी चार्ज के दौरान स्थायी रूप से अक्षम हो गया हो
7. जो व्यक्ति स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण अपनी सरकारी नौकरी खो चुका हो
8. ऐसे व्यक्ति जिनको स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए 10 कोड़ों या डंडों उससे अधिक या किसी प्रकार की शारीरिक यातना से गुजरा हो.
9. महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए कारावास, घर में नजरबन्द, जिलाबदर की न्यूनतम अवधि को 6 माह के स्थान पर 3 महीने ही माना गया है.
10. पति / पत्नी (विधवा / विधवा), अविवाहित और बेरोजगार बेटियां (अधिकतम अधिकतम तीन) और मृतक स्वतंत्रता सेनानियों (साथ ही शहीदों की) माता या पिता इस योजना के तहत आश्रित परिवार पेंशन के लिए पात्र हैं.
स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों को कितनी पेंशन मिलती है

1. पूर्व अंडमान के राजनीतिक कैदियों या उनके पति/पत्नियों को प्रति माह 30,600 रुपये मिलते हैं.

2. स्वतंत्रता सेनानियों जिन्होंने ब्रिटिश भारत के बाहर कठिनाइयों का सामना किया उनके आश्रितों को 28,560 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है.

3. अन्य स्वतंत्रता सेनानियों / पत्नियां (आईएनए सहित) 26,520 रुपये प्रतिमाह पेंशन

4. स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित माता-पिता / पात्र बेटियां (किसी भी समय अधिकतम 3 बेटियां) को स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली पेंशन का आधा लगभग 13,000 से 15,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं.

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ऊपर वर्णित पेंशन राशि के अलावा, स्वतंत्रता सेनानियों को निम्नलिखित सुविधाएं भी बढ़ा दी गई हैं.
1. स्वतंत्रता सेनानियों / उनकी विधवा / विधुर को पूरी जिंदगी के लिए एक अन्य साथी के साथ फ्री रेलवे पास (दुरंतो में 2nd और 3rd AC, राजधानी / शताब्दी / जनशताब्दी सहित किसी भी ट्रेन से 1st/2nd AC के पास).
2. स्वतंत्रता सेनानियों के पात्र आश्रितों को केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण
3. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों में केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य सेवा (सीजीएचएच) के तहत चिकित्सा सुविधाएं और नि: शुल्क चिकित्सा उपचार.
4. टेलीफोन कनेक्शन की सुविधा, बिना किसी अन्य शुल्क के केवल आधा किराये के भुगतान पर
5. शारीरिक विकलांग व्यक्तियों, असाधारण खेल प्रतिभा जैसे कोटे में स्वतंत्रता सेनानियों को को 4% आरक्षण गैस एजेंसियों, पेट्रोल पम्पों में दिया जाता है.
6. नई दिल्ली में स्वतंत्रता सेनानियों/उनके पात्र आश्रितों के लिए दिल्ली आने के दौरान मुफ्त में रहने और खाने की सुविधा.
7. अंडमान-स्वतंत्रता सेनानियों / उनकी विधवाओं को अंडमान -निकोबार द्वीप समूह का दौरा करने के लिए एक साथी के साथ मुक्त हवाई यात्रा की सुविधा

पिछले 10 सालों (2004-05 से 2016-17) में स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन पर 763 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किये जा चुके हैं. वर्तमान में स्वतंत्रता सैनिक सम्मान के तहत पेंशन पाने वालों को कई श्रेणियों में बांटा गया है. अभी पेंशन .13,390/माह से लेकर Rs.30,900/माह तक है. मार्च 2018 तक पेंशन की निम्न श्रेणियां हैं;

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सारांश के रूप में यह कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने इस देश की आजादी के लिए अपनी प्राणों की आहूति दी है. सरकार ने उनके आश्रितों के लिए बहुत सी सुविधाएँ भी उपलब्ध करायीं हैं. ये सुविधाएँ वर्तमान पीढ़ी को इस बात के लिए प्ररित करेंगी कि जब कभी भी देश को उनकी जरुरत पड़ेगी तो वे लोग देश सेवा के लिए कभी भी पीछे नही हटेंगे.

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