Search

क्या आप जानते हैं ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता क्या है

11-MAY-2018 17:59

    What is Global Dimming? HN

    जलवायु परिवर्तन औसत मौसमी दशाओं के पैटर्न में ऐतिहासिक रूप से बदलाव आने को कहते हैं। सामान्यतः इन बदलावों का अध्ययन पृथ्वी के इतिहास को दीर्घ अवधियों में बाँट कर किया जाता है। ऊर्जा संघटक का कार्य पृथ्वी की सतह तथा निचले वायुमण्डल में ऊष्मा संतुलन को बनाये रखना है। पृथ्वी अपनी ऊर्जा का अधिकांश भाग लघु तरंगों के माध्यम से सूर्य से प्राप्त करती है। अगर यही सूर्य उर्जा पृथ्वी के वायुमण्डल में संचित हो जाये तो भूमंडलीय ऊष्मीकरण (या ग्‍लोबल वॉर्मिंग) जैसी स्थिति हो जाएगी अगर वही सारे सूर्य उर्जा पृथ्वी से पूरी तरह से वापस चला जाये तो ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता की स्थिति बन सकती है।

    ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता क्या है?

    वैश्विक धुँधलापन, जिसे ग्लोबल डिमिंग (Global Dimming)  या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता भी कहते हैं, पृथ्वी की सतह पर वैश्विक प्रत्यक्ष ऊर्जा मान की मात्रा में क्रमिक रूप से आयी कमी को संदर्भित करता है। यह पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाले सूर्य के प्रकाश की मात्रा में गिरावट को दर्शाता है। इसका मुख्य कारण वातावरण में मानवीय क्रियाकलापों से गंधक कण जैसे कणों की उपस्थिति को माना जाता है। चूंकि वैश्विक धुँधलेपन के प्रभावस्वरूप शीतलन की अवस्था भी देखी गयी है इसलिए माना जाता है कि यह वैश्विक तापन के प्रभाव को अंशतः कम कर सकता है।

    कृत्रिम वर्षा क्या होती है और कैसे करायी जाती है?

    ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता के क्या कारण हैं

    1. एयरोसोल (Aerosols) जैसे ठोस कणों या तरल बूंदे, हवा या अन्य गैस के कोलाइड या श्लैष तंतु (colloid)) ग्लोबल डिमिंग के प्रमुख कारक हैं। वातावरण में अधिकांश एरोसोल सूरज से केवल तितर बितर प्रकाश, सूरज की कुछ उज्ज्वल ऊर्जा अंतरिक्ष में वापस भेजते देते जिसकी वजह से पृथ्वी के जलवायु पर ठंडा प्रभाव पड़ता हैं।

    2. सल्फर डाइऑक्साइड या उद्योग और आंतरिक दहन इंजन द्वारा जीवाश्म ईंधन जलाने के उप-उत्पाद जैसे कण वातावरणों में प्रवेश करते हैं और सीधे सौर ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से पहले, अंतरिक्ष में विकिरण कर देते हैं।

    3. सल्फर डाइऑक्साइड तथा उद्योग और आंतरिक दहन इंजन द्वारा जीवाश्म ईंधन जलाने के उप-उत्पाद वाली प्रदूषित जल जब वाष्पीकरण से बदल (ऐसे बादलों को ‘भूरा बादल’ भी कहा जाता है) का रूप ले लेती है तब बदल में विद्यमान कण सूर्य की उर्जा को संचित कर उसे विकिरण कर देते हैं। जिसके प्रभावस्वरूप पृथ्वी पर शीतलन की अवस्था हो जाती है।

    4. वायु में उड़ने वाले विमानों से उत्सर्जित वाष्प विकिरण ककर देते हैं, जिसे ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता के कारको में से एक है।

    जल पदचिह्न क्या है?

    ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता कैसे पृथ्वी के वायुमंडल को प्रभावित करता है?

    ग्लोबल वार्मिंग की तरह, ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता भी पृथ्वी के वायुमंडलीय तापमान  के साथ-साथ जीवित प्राणियों पर भी प्रभाव डालाता है।

    1. यह पृथ्वी के वायुमंडलीय तापमान को कम कर देता है जिसके वजह से वर्षा कम हो जाएगी और सूखाग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाएगी।

    2. प्रदूषक और उप-उत्पादों के कारण घने कोहरे, अम्लीय बारिश और प्रदूषण, श्वसन रोग जैसे कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

    3.  ग्लोबल डिमिंग या सार्वत्रिक दीप्तिमंदकता की वजह से शीतलन प्रभाव वनस्पति तथा मिट्टी पर भी पड़ता है जिसकी वजह से भूक्षरण आदि जैसे स्थिति पैदा हो सकती है।

    ग्लोबल डिमिंग बनाम (Vs) ग्लोबल वार्मिंग

    1. ग्लोबल डिमिंग वैश्विक तापन के प्रभाव को अंशतः कम कर सकता है जबकि ग्लोबल वार्मिंग वैश्विक तापन के प्रभाव को अंशतः बढ़ा सकता है।

    2. ग्लोबल डिमिंग, ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा रूप है।

    ग्लोबल डिमिंग, भूमंडलीय ऊष्मीकरण (या ग्‍लोबल वॉर्मिंग) के विपरीत है क्योंकि यह शीतलन प्रभाव पैदा करता है। इसे ग्लोबल वार्मिंग पर कार्बन उत्सर्जन का वास्तविक प्रभाव माना जाता है। इसलिए, हम कह सकते हैं कि वैश्विक ग्लोबल डिमिंग और ग्लोबल वार्मिंग दोनों ही हमारे पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं तथा इसके रोक धाम के लिए हमे बहुत ही सख्त कदम उठाना पड़ेगा।

    पर्यावरण और पारिस्थितिकीय: समग्र अध्ययन सामग्री

    DISCLAIMER: JPL and its affiliates shall have no liability for any views, thoughts and comments expressed on this article.

    Newsletter Signup

    Copyright 2018 Jagran Prakashan Limited.
    This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK