Comment (0)

Post Comment

3 + 9 =
Post
Disclaimer: Comments will be moderated by Jagranjosh editorial team. Comments that are abusive, personal, incendiary or irrelevant will not be published. Please use a genuine email ID and provide your name, to avoid rejection.

    क्रोनी कैपिटलिज्म: अर्थ और उदाहरण

    क्रोनी कैपिटलिज्म का अर्थ ऐसी पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से है जिसमें एक बिज़नेस की सफलता बाजार की शक्तियों के द्वारा नहीं बल्कि राजनीतिक वर्ग और व्यापारी वर्ग के बीच सांठगांठ पर निर्भर करती है. इसमें सरकार ऐसी नीतियां बनाती है जिससे एक विशेष वर्ग को लाभ होता है और यह ‘लाभ कमाने वाला वर्ग’ भी सरकार को कुछ लाभ ट्रान्सफर करता रहता है.
    Created On: Jul 24, 2020 18:10 IST
    Modified On: Jul 24, 2020 18:10 IST
    Crony Capitalism Meaning in hindi
    Crony Capitalism Meaning in hindi

    एक कहावत है कि बिना ‘अर्थ के कोई तंत्र’ नहीं होता है. दुनिया में पूंजीवाद, साम्यवाद, समाजवाद और मिश्रित अर्थव्यवस्था जैसी कई आर्थिक प्रणालियां हैं. इन सभी प्रणालियों में उत्पादन के चार कारक हैं; भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमी काम करते हैं.

    उत्पादन का चौथा कारक अर्थात उद्यमी, दुनिया में कई औद्योगिक क्रांतियों के लिए जिम्मेदार है. किसी उद्यमी की सफलता काफी हद तक संबंधित देश की सरकार के राजनीतिक समर्थन पर निर्भर करती है.

    जैसे जैसे हम अधिक आर्थिक और तकनीकी विकास कर रहे हैं, आय असमानता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है जिसका मुख्य कारण है राजनेताओं और उद्यमियों के बीच एक मजबूत सांठगांठ. इस सांठगांठ को ही क्रोनी कैपिटलिज्म कहा जाता है.

    क्रोनी कैपिटलिज्म का अर्थ क्या है (Meaning of Crony Capitalism):-

    ऑक्सफर्ड डिक्शनरी के अनुसार, क्रोनी का शाब्दिक अर्थ होता है 'अ क्लोज फ्रेंड ऑर कंपैनियन (करीबी दोस्त या सखा)'.यह शब्द ग्रीक भाषा के शब्द 'ख्रोनियोज' से बना है जिसका अर्थ होता है 'लंबे समय तक टिकने वाला'.

    क्रोनी कैपिटलिज्म का अर्थ ऐसी अर्थव्यवस्था से है जिसमें एक बिज़नेस की सफलता बाजार की शक्तियों के द्वारा नहीं बल्कि राजनीतिक वर्ग और व्यापारी वर्ग के बीच सांठगांठ पर निर्भर करती है. इसमें सरकार ऐसी नीतियां बनाती है जिससे एक विशेष वर्ग को लाभ होता है और यह लाभ कमाने वाला वर्ग भी सरकार को कुछ लाभ ट्रान्सफर करता रहता है.

    एक व्यवसाय की सफलता; सरकार द्वारा सरकारी अनुदान देना, लचर कर संरचना, अपने पसंद के लोगों को टेंडर देना, व्यापारी वर्ग के हितों के लिए नीतियां बनाना, प्रतियोगिता को रोकना, नयी फार्मों के प्रवेश को रोकना, और अन्य तरह से व्यापारिक सहयोग शामिल है.  

    क्रोनी कैपिटलिज्म इंडेक्स (Crony Capitalism Index):-

    यह सूचकांक इस बात की गणना करता है कि उद्योगों में कितनी आर्थिक गतिविधियां होती हैं जो कि क्रोनिज़्म से ग्रस्त हैं? क्रोनी कैपिटलिज्म इंडेक्स 2014 में जर्मनी सबसे साफ-सुथरा देश था, जहां देश का सिर्फ एक व्यापारी / अरबपति क्रोनियन क्षेत्रों से अपनी संपत्ति लाता था. दूसरी ओर, रूस सबसे खराब रैंक पर था, जहां देश का 18% धन देश के क्रोनी क्षेत्रों से आता था.

    Crony-capitalism-index-2014

    भारत को क्रोनी-कैपिटलिज्म इंडेक्स में 9वें स्थान पर रखा गया था, यहाँ देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4% हिस्सा क्रोनिज़्म क्षेत्र से आता था.

    क्रोनी कैपिटलिज्म इंडेक्स 2016 में, रूस सबसे खराब दशा में था जिसके बाद मलेशिया को दूसरी रैंक, फिलीपींस को तीसरी रैंक पर और सिंगापुर को चौथी रैंक पर रखा गया था.

    क्रोनी-कैपिटलिज्म के उदाहरण (Example of Crony Capitalism):-

    इस उदाहरण में हम अपनी बाध्यताओं के कारण उन उद्योगपतियों के नाम नहीं बता रहे हैं जो कि भारत में क्रोनी-कैपिटलिज्म के कारण हाल ही में भारत के सबसे धनाढ्य लोगों में शामिल हुए हैं.

    what-sold-adani-by-modi

    (अडानी ने क्या क्या खरीदा है )

    भारत में कई कंपनियां हैं जो पिछले 6 सालों से भारी मुनाफा कमा रही हैं. ये कंपनियां राजनीतिक दलों को चुनावी चंदे के नाम पर मोटी रकम दान कर रही हैं और बदले में राजनीतिक दल इन कंपनियों के मालिकों के लिए कई अनुकूल नीतियों और निविदाओं, कर छूट, सब्सिडी, और नए लाइसेंस पर रोक लगाकर इनका सपोर्ट कर रहे हैं.

    यदि आप भारत के अरबपतियों की सूची देखें, तो उनमें से कुछ ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कुल संपत्ति में कई गुना वृद्धि की है और टॉप 10 अमीरों की सूची में जगह बना ली है. यह सब क्रोनी-कैपिटलिज्म का ही परिणाम है.

    ऑक्सफैम की रिपोर्ट 2019, "पब्लिक गुड या प्राइवेट वेल्थ" शीर्षक से पता चला कि भारत के शीर्ष 10% अमीर कुल 77.4% राष्ट्रीय सम्पति के मालिक हैं. दूसरी तरफ भारत की निचले पायदान की 60% आबादी, राष्ट्रीय संपत्ति का केवल 4.8% रखती है.

    इस क्रोनी-कैपिटलिज्म का ही परिणाम है कि भारत और दुनिया में अमीर व्यक्ति और अमीर और गरीब व्यक्ति और गरीब होता जा रहा है.
    इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि क्रोनी कैपिटलिज़्म से देश और दुनिया की कुल संपत्ति केवल कुछ लोगों के हाथों में केन्द्रित होती जा रही है और 7.5 करोड़ आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी भूखे पेट सोने को मजबूर है.

    उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019: अर्थ और प्रमुख विशेषताएं
    फ्लोटिंग रेट बॉन्‍ड क्या होता है?