Search

यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो क्या-क्या बदल जायेगा?

संविधान के अनुच्छेद 239A के तहत दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है. सन 1991 में 69वें संविधान संशोधन से दिल्ली को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया और इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया, साथ ही लेफ्टिनेंट गवर्नर को दिल्ली का प्रशासक नामित किया गया था. अब केजरीवाल सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास कर रही है. आइये इस लेख में जानते हैं कि दिल्ली के पूर्ण राज्य बनने के बाद यहाँ क्या-क्या बदल जायेगा?
Sep 11, 2019 10:59 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon
Delhi Map
Delhi Map

सन 1991 में 69वें संविधान संशोधन से दिल्ली को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया और इसे “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र” घोषित किया गया, साथ ही लेफ्टिनेंट गवर्नर को दिल्ली का प्रशासक नामित किया गया था. दिल्ली का लेफ्टिनेंट गवर्नर या उप-राज्यपाल, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली का संवैधानिक प्रमुख है. इस पद का सृजन पहली बार सितंबर 1966 में किया गया था. दिल्ली के सबसे पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर आदित्य नाथ झा, आईसीएस थे. 

दिल्ली में प्रशासन की वर्तमान स्थिति क्या है?

ज्ञातव्य है कि संविधान के अनुच्छेद 239A के तहत दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है. इसके तहत निम्न प्रावधान हैं;

1. दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है

2. दिल्ली की अपनी 70 सीटों वाली विधानसभा है जिसका मुखिया मुख्यमंत्री होता है.

3. प्रशासक उपराज्यपाल होंगे और राष्ट्रपति की ओर से काम करेंगे

4. दिल्ली विधान सभा को राज्य सूची और समवर्ती सूची पर कानून बनाने का अधिकार है लेकिन “जन, जमीन और पुलिस” पर दिल्ली विधानसभा कानून नहीं बना सकती. यह पूरी तरह से केंद्र का अधिकार क्षेत्र है.

5. उपराज्यपाल (LG); मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल की सलाह से फ़ैसला करेंगे हालाँकि यह कहीं नहीं लिखा है कि LG, सलाह मानने को बाध्य है.

6. जिस मुद्दे पर उपराज्यपाल और मंत्रियों के बीच किसी तरह का मतभेद पैदा होता है तो उपराज्यपाल इस मामले को राष्ट्रपति के पास भेज सकता है और उसी का निर्णय अंतिम होगा, लेकिन यदि कोई मामला बहुत अर्जेंट है तो ऐसे मामलों में उपराज्यपाल को यह अधिकार है कि वह अपने विवेक से निर्णय ले.

दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर्स की सूची

यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो क्या बदल जायेगा?
वर्तमान में दिल्ली एक ऐसे राज्य के रूप में काम कर रहा है जिसके पास एक पूरा कंकाल तंत्र तो मौजूद है लेकिन उसे इस कंकाल तंत्र को जीवित रखने या चलाने के लिए केंद्र सरकार से खून उधार लेना पड़ता है.
वर्तमान केजरीवाल सरकार ने पूर्ण राज्य की मांग की दिशा में कदम बढ़ाते हुए “The State of Delhi Bill 2016” ड्राफ्ट का मसौदा पेश किया है जिसे इसे सार्वजनिक कर लोगों के सुझाव मांगे गये हैं. अब जानते है कि यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो क्या-क्या बदल जायेगा;

full state status delhi

1. दिल्ली सरकार का यह ड्राफ्ट, एनसीटी के क्षेत्रीय या राजनीतिक क्षेत्राधिकार में कोई भी परिवर्तन प्रस्तावित नहीं करता है. नई दिल्ली नगर पालिका क्षेत्र; संसद के विधायी नियंत्रण और राष्ट्रपति के कार्यकारी नियंत्रण के तहत रहेगी जो कि राज्यपाल के माध्यम से कार्य करेगा अर्थात दिल्ली में उपराज्यपाल की जगह राज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी.

2. वर्तमान में दिल्ली के पास अपना “लोक सेवा आयोग” नही है इसलिए दिल्ली सरकार का ड्राफ्ट यूपीएससी में दिल्ली के अपने इस्तेमाल के लिए एक कैडर चाहता है. जिसमें अधिकारियों की नियुक्ति दिल्ली सरकार अपने हिसाब से कर सकेगी और नियुक्तियों में राज्यपाल का हस्तक्षेप ख़त्म हो जायेगा जैसा कि पूर्ण दर्जा प्राप्त राज्यों में होता है.

3. दिल्ली को अपनी पुलिस और अन्य सेवाओं के लिए भुगतान करना होगा जिनका भुगतान वर्तमान में केंद्र सरकार करती है. प्रदेश को चलाने के लिए प्रशासनिक खर्च कई गुना बढ़ जायेगा जिसकी भरपाई करने के लिए दिल्ली सरकार को कई करों को बढ़ाना पड़ेगा और इसका अंतिम बोझ लोगों की जेब पर पड़ेगा.

4. वर्तमान में दिल्ली में ईंधन और अन्य वस्तुओं पर वैट की दर बेंगलुरू, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों की तुलना में कम है. लेकिन जब दिल्ली सरकार को अपने खर्चों का इंतजाम खुद ही करना पड़ेगा तो उसे इन वस्तुओं पर कर की दर बढ़ानी पड़ेगी जिससे यहाँ पर महंगाई बढ़ जाएगी.

5. दिल्ली को अन्य राज्यों से बिजली और पानी खरीदना जारी रखना पड़ेगा क्योंकि यहाँ जगह नहीं होने के कारण सरकार बिजली संयंत्र स्थापित नहीं कर सकती है और अगर नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा का मन बनाया तो ऐसा हो नहीं पायेगा क्योंकि ये दोनों साधन बहुत महंगे हैं.
इसलिए अभी चुनाव से पहले केजरीवाल सरकार फ्री बिजली और पानी का सपना दिखाती है उसे भूलना होगा. साथ ही अभी दिल्ली में बिजली की दरें जो कि पूरे देश में सबसे कम है उन्हें भी बढ़ाना पड़ सकता है.

6. यदि दिल्ली पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल कर लेता है तो उसे वित्त आयोग की तरफ पैसा मिलने लगेगा जैसा कि अभी अन्य राज्यों को मिलता है.

इस प्रकार स्पष्ट है कि यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो इस राज्य का मुख्यमंत्री भी अन्य राज्यों की तरह अपने विवेक से निर्णय ले सकेगा और उसे हर निर्णय के लिए उपराज्यपाल से अनुमति लेने की जरुरत नहीं होगी. इसके साथ ही जहाँ केंद्र से मिलने वाली वित्तीय मदद बंद हो जाएगी तो इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उसे वित्त आयोग की तरफ पैसा मिलने लगेगा.

दिल्ली के उप-राज्यपाल की क्या शक्तियां हैं?

भारत के संघ शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर और प्रशासकों की सूची