Tokyo Olympics में पदक जीतने में चीन इतना सफल क्यों रहा है?

जैसा की हम जानते हैं कि 2020 का ओलंपिक टोक्यो में शुरू हुआ है और यह भी देखा गया है कि चीन का प्रदर्शन दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक रहा है. आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि चीन किस स्ट्रेटेजी पर काम करता है की उसका प्रदर्शन इतना सफल रहता है.
Created On: Aug 3, 2021 14:36 IST
Modified On: Aug 3, 2021 15:27 IST
Tokyo Olympics
Tokyo Olympics

अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं देशों को दुनिया के बाकी हिस्सों में अपने देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करती हैं. यह एक ऐसा मंच हैं जिनका उपयोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने और देश की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है.

शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से, चीन ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में एक शीर्ष प्रतियोगी रहा है.

1980 के बाद से हर शीतकालीन ओलंपिक में भाग लेने के बावजूद, चीन अपना पहला शीतकालीन पदक घर नहीं ला पाया था. लेकिन 1992 में चीनी स्पीड स्केटर Ye Qiaobo ने महिलाओं की 500 मीटर में रजत जीता.

आइये अब जानते हैं कि चीन ऐसी कौन सी स्ट्रेटेजी पे काम करता है कि जिसके कारण उसका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ में से एक रहता है.

चीन की ओलंपिक की आधिकारिक शुरुआत ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 1952 से और शीतकालीन ओलंपिक में 1980 के बाद हुई थी लेकिन धीरे -धीरे चीन ने कई सारे मेडल्स जीते.

वहीं पिछले तीन ओलंपिकस की बात करें तो 

चीन ने 2008 की गर्मियों में 29वें ओलंपिक खेलों की मेजबानी की थी. बीजिंग ओलंपिक में पहली बार चीन ने ओलंपिक में मेजबानी की थी. यहीं आपको बता दें कि बीजिंग ने 2008 के ओलंपिक के लिए कुछ 400,000 शहर स्वयंसेवकों और 100,000 खेल-समय स्वयंसेवकों की मदद ली थी.

चीन के नेताओं के लिए, 2008 के ओलंपिक ने चीन की एथलेटिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ चीन की राष्ट्रीय ताकत को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान किया.

2008 के ओलंपिक खेलों में, चीन 58 स्वर्ण पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर था. 2012 लन्दन में 2016 रियो डी जीनेरियो में प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा था लेकिन टोक्यो ओलंपिक में चीन ने अब तक सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक जीते हैं. ऐसा देखा गया है की चीन का फोकस सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक पर ही रहता है. 

ओलंपिक में चीन का इतिहास

चीन और ओलंपिक के बीच सबसे पहली भागीदारी 1894 की है, जब आधुनिक आयोजन के संस्थापक Pierre de Coubertin और तत्कालीन ग्रीक राजकुमार ने चीन में फ्रांसीसी दूतावास के माध्यम से किंग राजवंश के शासकों को निमंत्रण जारी किया था.

उन्होंने उन्हें 1896 में एथेंस में होने वाले पहले आधुनिक ओलंपियाड में एथलीटों को भेजने के लिए कहा, लेकिन किंग सरकार ने खेल आयोजनों से उनकी अपरिचितता के कारण कोई जवाब नहीं दिया था.

1949 से पहले, अस्थिर घरेलू राजनीतिक स्थितियों के कारण, चीन खेलों में बहुत अच्छा नहीं था. 1949 से पहले जो आज पीप्लेस रिपब्लिक ऑफ़ चाइना है वो रिपब्लिक ऑफ़ चाइना हुआ करता था. इसमें ताइवान और मेनलैंड चाइना शामिल थे. हैसे आज कम्युनिस्ट पार्टी का एक शासन है उसी प्रकार 1912 से 1949 तक Kuomintang का शासन था.

चीन ने इससे पहले 1932 में एकल एथलीट के साथ ओलंपिक खेलों में भाग लिया था.

ऐसा बताया जाता है कि 1935 में चीन ने कुछ तैयारी की थी और तैयारी स्कूलों पर लगभग 2 लाख युआन खर्च की मंजूरी दी थी यानी बर्लिन ओलंपिक से पहले. एक प्रतिनिधि मंडल तैयार किया गया जिसमें 69 प्रतियोगियों एथलेटिक्स, स्विमिंग, बास्केटबॉल, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और साइकिलिंग, 39 ऑब्सरवर्स और चीनी मार्शल आर्ट वुशु के 9 डेमोंसट्रेटरस शामिल थे. 

बर्लिन ओलंपिक के दौरान चीनी पत्रकारों का एक दल भी बर्लिन पहुंचा लेकिन अपने खर्चे पर. हालाँकि कोई पदन नहीं जीते गए लेकिन ओलंपिक के बाद वुशु डेमोंसट्रेटरस डेनमार्क, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, हंगरी, इटली और चेकोस्लोवाकिया गए. इसके अलावा विद्वानों, शिक्षकों और फिजिकल शिक्षकों सहित ऑब्सरवर्स की टीम यूरोप में रही और यूरोपीय खेल सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया.

ये टूर बाद में चीन के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ.बर्लिन ओलंपिक के बाद 1940 और 1944 के ओलंपिक खेलों को द्वितीय विश्व युद्ध के कारण रद्द कर दिया गया था.

ROC ने 1948 के ओलंपिक में भाग लिया लेकिन प्रदर्शन बहुत खराब था और दल को सरकार का समर्थन नहीं था. 1948 के बाद चीन में सरकार का तख्ता पलट हुआ और चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का प्रशासन शुरू हुआ. इसके बाद काफी बदलाव हुए. लन्दन ओलंपिक के बाद Kuomintang सरकार को ओवर थ्रो किया किया गया और 1949 में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना स्थापित हुआ और यहाँ से ग्लोबल ओलंपिक मूवमेंट की शुरुआत होती है. यह लोगो के स्वास्थ्य और स्पोर्ट्स पर ध्यान केन्द्रित करने लगी.

चीन का मेनलैंड कम्युनिस्ट पार्टी के अंतर्गत आ गया लेकिन Kuomintang प्राधिकारी वर्ग ताइवान में बाकि थे.  

जुलाई 1952 को, IOC ने चीनी ओलंपिक समिति (COC) को चीन के खेल प्रतिनिधित्व का एकमात्र प्रतिनिधि घोषित करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. एलिगेशन काफी देर से पहुंचा और अपना लाल झंडा फहराया और उस वक्त यही सबसे बड़ी जीत मानी गई. 

हालांकि, 1954 में IOC ने एक प्रस्ताव अपनाया और COC को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी. तब ऐसा लगने लगा था की चीन का प्रतिनिधित्व का मामला सुलझ गया है परन्तु ऐसा नहीं था.

इसके बाद IOC की देशों की लिस्ट में दो चाइना सामने आए. 1956 में, IOC के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने "दो चाइना" समस्या को उठाना जारी रखा और ज़ोर देकर कहा कि ताइवान केवल मेलबर्न में 16वें ओलंपिक में भाग लेगा. COC ने IOC के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया और खेलों से हट गया.

19 अगस्त, 1958 को ऑल-चाइना स्पोर्ट्स फेडरेशन ने IOC के साथ सभी संबंधों को रोकने की घोषणा की. COC और इससे जुड़े खेल संघ जून-अगस्त के दौरान एक के बाद एक 15 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हट गए. तत्कालीन  IOC सदस्य Dong Shouyi ने भी इस्तीफा दे दिया था.

 IOC ने तब ताइवान में एक राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के रूप में एक खेल संगठन को मान्यता दी और 1970 में अपने स्थानीय आधिकारिक Xu Heng को  IOC सदस्य के रूप में चुना.

इस अवधि के दौरान, ताइवान प्रांत के एथलीटों ने पांच ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लिया, जिनमें से Yang Chuanguang पहले चीनी ओलंपिक पदक विजेता बने, जब उन्होंने 1960 में रोम ओलंपिक में पुरुषों की डिकैथलॉन (Decathlon) स्पर्धाओं में उपविजेता हासिल किया.

Ji Zheng 1968 में मैक्सिको ओलंपिक में महिलाओं की 80 मीटर बाधा (80m hurdles) दौड़ में तीसरा स्थान हासिल करने के बाद पदक पाने वाली पहली चीनी महिला थीं.

1973 में, चीनी ओलंपिक समिति एशियाई ओलंपिक परिषद की सदस्य बनी.

अक्टूबर 1979 में, नागोया (Nagoya) में आयोजित एक बैठक में, IOC कार्यकारी बोर्ड ने चीन के प्रतिनिधित्व की समस्या पर एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें COC को पूरे चीन में ओलंपिक आंदोलन के प्रतिनिधि के रूप में पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का उपयोग करने की पुष्टि की गई. जबकि ताइवान क्षेत्र में ओलंपिक समिति, चीन के स्थानीय संगठनों में से एक के रूप में, केवल "Chinese Taipei Olympic Committee" के नाम का उपयोग अपने ध्वज, गान और प्रतीक के साथ कर सकती है पर ओरिजिनल से अलग लेकिन IOC की मंजूरी नहीं मिली थी. प्रस्ताव को IOC के सदस्यों ने 62 के पक्ष में, 17 के विरोध में और 2 मतों से abstentions के साथ पारित किया था.

1980 में, चीन ने लेक प्लेसिड शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लिया, जिसमें कुल 18 स्पर्धाओं में भाग लेने के लिए 28 एथलीट भेजे गए. 

1981 में, He Zhenliang IOC सदस्य चुने गए, और फिर 1985 में IOC कार्यकारी बोर्ड के सदस्य और 1989-1993 के लिए उपाध्यक्ष चुने गए.

Chinese Taipei Olympic Committee 1982 में एशियाई ओलंपिक परिषद की सदस्य बनी.

जब 1984 में लॉस एंजिल्स में 23वां ओलंपिक आयोजित किया गया, तो चीन ने 353 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजा, जिसमें जिमनास्टिक के लिए 224 एथलीट और अन्य 15 इवेंट शामिल थे.

L.A. खेलों में चीन का पहला स्वर्ण पदक एक शार्पशूटर Xu Haifeng ने जीता, जो ओलंपिक इतिहास में ऐसा सम्मान जीतने वाले पहले चीनी भी बने.

Wu Xiaoxuan ने स्टैंडर्ड स्मॉल-बोर राइफल शूटिंग में खिताब जीता, ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाली पहली चीनी महिला बनीं.

जिम्नास्टिक स्टार Li Ning ने तीन स्वर्ण पदक, दो रजत पदक और एक कांस्य पदक जीता. कुल मिलाकर, चीनी एथलीटों ने 15 स्वर्ण, आठ रजत और नौ कांस्य पदक जीते, जो स्वर्ण पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहे.

Chinese Taipei Olympic Committee ने 67-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजे, जिसमें 57 एथलीट शामिल थे, और 2 कांस्य जीते. 1948 के बाद पहली बार चीन और Chinese Taipei दोनों ने ओलंपिक में भाग लिया.

आइये अब चाइना की स्ट्रेटेजी के बारे में जानते हैं 

49 किलोग्राम Weightlifting खेल स्पर्धा में भारत की मीराबाई चानू को चीन की Hou Zhihui ने हराया. भारत की मीराबाई चानू ने सिल्वर पदक जीता और वहीं चीन की Hou Zhihui ने स्वर्ण पदक. 

NYT के अनुसार Hou Zhihui बचपन से ही ओलंपिक में स्वर्ण जीतने के मिशन पर रही हैं. सोवियत मॉडल की तरह, चीन बच्चों के लिए राज्य संचालित सख्त प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करता है. ऐसा भी बताया जाता है कि चीन मुख्य रूप से उन खेलों पर भी ध्यान केंद्रित करता है जो पश्चिम में कम वित्त पोषित हैं. ये ऐसे स्पोर्ट्स हैं जिनमें एक से ज्यादा स्वर्ण पदक दिए जाते हैं. 

NYT के अनुसार, 1984 के बाद से चीन ने जितने ओलंपिक स्वर्ण जीते हैं, उनमें से 75 प्रतिशत केवल छह खेलों में हैं: टेबल टेनिस, निशानेबाजी, Diving, बैडमिंटन, जिमनास्टिक और Weight lifting. चीन के दो-तिहाई से अधिक स्वर्ण पदक महिला चैंपियन के सौजन्य से आए हैं, और इसके टोक्यो प्रतिनिधिमंडल में लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं हैं.

महिलाओं का  Weight lifting, जो 2000 के सिडनी खेलों में पदक का खेल बन गया, बीजिंग की स्वर्ण पदक रणनीति के लिए एक आदर्श लक्ष्य था.

"प्रणाली अत्यधिक कुशल है," रियो डी जनेरियो में 2016 खेलों में Weight lifting squad के प्रमुख Li Hao ने कहा "शायद यही कारण है कि हमारा Weight lifting अन्य देशों और क्षेत्रों की तुलना में अधिक उन्नत है."

चीन में प्रशिक्षण केंद्रों पर चीनी झंडा लगातार एथलीटों को याद दिलाता है कि उनका प्रदर्शन मुख्य रूप से राष्ट्र के लिए है.

Tokyo Olympic 2020 में रूस पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?

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