Search

क्रिसमस डे 25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है?

क्रिसमस डे पूरे विश्व में 25 दिसंबर को मनाया जाता है. परन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि 25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है? इसे बड़ा दिन भी कहते हैं. इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं और नेशनल हॉलिडे भी होती है.   
Dec 24, 2019 18:18 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon
Christmas Day
Christmas Day

आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि क्रिसमस डे का इतिहास, क्रिसमस ट्री का क्या महत्व है, सांता क्लॉज कौन है, इत्यादि.

क्रिसमस डे का इतिहास

बाइबल में जीसस के जन्म का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन फिर भी 25 दिसंबर को क्रिसमस डे हर साल मनाया जाता है. इस तारीख को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है. इससे जुड़ी कई मान्यताएं हैं.

एक मान्यता के अनुसार, सबसे पहले क्रिसमस डे 336 A.D में रोमन के पहले ईसाई सम्राट Constantine के समय 25 दिसंबर को मनाया गया था. इसके कुछ सालों बाद पॉप जूलियस (Pope Julius ) ने आधिकारिक तौर पर 25 दिसंबर को जीसस का जन्मदिन क्रिसमस डे के रूप में मनाने का ऐलान कर दिया.

एक और मान्यता के अनुसार 25 मार्च को मैरी ने गर्भाधान के बारे में बताया की वह एक विशेष बच्चे को जन्म देंगी जिनका नाम जीसस होगा इसे  Annunciation भी कहा जाता है. 25 मार्च से नौ महीने बाद 25 दिसंबर होता है जब जीसस का जन्म हुआ होगा. इसलिए भी 25 दिसंबर को क्रिसमस डे के रूप में मनाया जाता है. यहीं आपको बता दे कि 25 मार्च को ही जीसस की मृत्यु हुई थी.

जानिये विश्व में किस किस तरीके से नया साल मनाया जाता है?

आइये क्रिसमस ट्री की उत्पत्ति के बारे में देखते हैं.

जिस प्रकार से ईसाईयों ने क्रिसमस को रोमन पैगनों (Roman Pagans) के Saturnalia फेस्टिवल से जोड़ा था इसी प्रकार से ऐशेरा संप्रदाय (Asheira sect) के अनुयायी और इसकी शाखा के सदस्यों को चुना गया जो कि "क्रिसमस ट्री" को मानते थे और इम्पोर्टेंस देते थे. ऐसा माना जाता है कि पैगनों ने सदियों से जंगल में पेड़ों की पूजा की थी, उन्हें अपने घरों में उगाया था और सजाया था. इसलिए इस सेरेमनी को चर्च में ईसाईयों द्वारा आनंद के साथ मनाया जाने लगा.

क्या आप जानते हैं कि 1510 में क्रिसमस ट्री को सजा के सबसे पहले रीगा, लात्विया (Riga, Latvia) में रखा गया था? जर्मनी में पहले क्रिसमस ट्री को सेब, ginger bread, वेफर्स और मिठाइयों से सजाया गया था. विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार के पेड़ों का उपयोग क्रिसमस ट्री के रूप में किया जाता है और हर बार वे देवदार के पेड़ (fir trees) नहीं होते हैं. जैसे न्यूजीलैंड में – ‘Pohutakawa' का पेड़ का उपयोग किया जाता है और इसमें लाल फूल होते हैं.

1950 और 60 के दशक में एल्यूमीनियम और पीवीसी प्लास्टिक के पेड़ों का बड़े पैमाने पर artificial क्रिसमस ट्री के रूप में उत्पादन हुआ. Artificial पेड़ों ने महत्वपूर्ण लोकप्रियता हासिल की, खासकर उन देशों में जहां ताजे पेड़ों की खरीद मुश्किल थी. ऐसा माना जाता है कि असली क्रिसमस ट्री हवा से धूल और pollens को air से हटाने में मदद करते हैं. 

आइये अब सीक्रेट सैंटा और उनके मोज़े में गिफ्ट की कहानी के बारे में देखते हैं.

एक प्रचलित कहानियों के अनुसार चौथी शताब्दी में एशिया माइनर के मायरा (अब तुर्की) में सेंट निकोलस (St. Nicholas) नाम का एक शख्स रहता था. जो काफी अमीर था, लेकिन उनके माता-पिता का देहांत हो चुका था. सेंट निकोलस ज्यादातर चुपके से गरीब लोगों की मदद किया करते थे. उन्हें सीक्रेट गिफ्ट (Secret Gifts) देकर खुश करने की कोशिश करते थे.

एक दिन निकोलस (Saint Nicholas) को पता चला कि एक गरीब आदमी की तीन बेटियां है, जिनकी शादियों के लिए उसके पास बिल्कुल भी पैसा नही है. ये बात जान निकोलस इस शख्स की मदद करने पहुंचे. एक रात वो इस आदमी की घर की छत में लगी चिमनी के पास पहुंचे और वहां से सोने से भरा बैग डाल दिया. उस दौरान इस गरीब शख्स ने अपना मोज़ा सुखाने के लिए चिमनी में लगा रखा था.

इस मोज़े में अचानक सोने से भरा बैग उसके घर में गिरा. ऐसा एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुआ. आखिरी बार में इस आदमी ने निकोलस (Nicholas) को देख लिया. निकोलस ने यह बात किसी को ना बताने के लिए कहा. लेकिन ऐसी बातें छिपती कहा हैं. जब भी किसी को सीक्रेट गिफ्ट (Secret Gifts) मिलता सभी को ये लगता कि यह निकोलस ने दिया है.

धीरे-धीरे निकोलस की ये कहानी पॉपुलर हुई. क्योंकि क्रिसमस के दिन बच्चों को तोहफे देने का प्रथा रही है. इसीलिए ऐसा कहा जाता है कि सबसे पहले यूके (UK) में निकोलस की कहानी (St. Nicholas Story) को आधार बनाया और उन्हें फादर क्रिसमस (Father Christmas) और ओल्ड मैन क्रिसमस (Old Man Christmas) नाम दिया गया. इसके बाद पूरी दुनिया में क्रिसमस के दिन मोज़े में गिफ्ट देने यानी सीक्रेट सैंटा (Secret Santa) बनने का रिवाज आगे बढ़ता चला गया.

सैंटा क्लॉज़ का वर्तमान चित्रण हार्पर की साप्ताहिक (Harper’s Weekly) कार्टूनिस्ट थॉमस नास्ट (cartoonist Thomas Nast) जो कि 1863 में शुरू की गई थी की छवियों पर आधारित है. नास्ट के सैंटा की छवि को “A Visit from St. Nicholas” (also known as “Twas the Night Before Christmas”) जो कि 1823 में प्रकाशित हुई थी से भी जोड़ा गया है. सैंटा क्लॉज़ की छवि को आगे चलकर 1931 में कोका-कोला कंपनी के लिए बनाए गए विज्ञापनों में illustrator Haddon Sundblum द्वारा परिभाषित भी किया गया. Sundblum ने सैंटा को एक काले रंग की बेल्ट, काले जूते, एक नरम लाल टोपी, सफेद फर ट्रिम, और इसके साथ एक लाल सूट पहने एक सफेद-दाढ़ी वाले सज्जन के रूप में दिखाया है.

अंत में देखते हैं कि क्रिसमस डे को कैसे मनाया जाता है?

क्रिसमस डे का फेस्टिवल लगभग 12 दिनों तक चलता है. 25 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच के समय को क्रिसमस के बारह दिनों (Twelve Days of Christmas ) के रूप में जाना जाता है.

दुनिया के सभी हिस्सों की तरह भारत में भी क्रिसमस डे धूमधाम से मनाया जाता है. बाज़ारों को क्रिसमस ट्री और लाइटों से सजाया जाता है. 24 दिसंबर को लोग ईस्टर ईव मनाते हैं और 25 दिसंबर को घरों में पार्टी करते हैं. घर को सजाते हैं. इस दिन लोग क्रिसमस ट्री को घर लाकर कैंडी, चॉकलेट्स, खिलौने, लाइट्स, बल्ब और गिफ्ट्स से सजाते हैं, बच्चों को गिफ्ट्स देते हैं, इत्यादि.

हिन्दू नववर्ष को भारत में किन-किन नामों से जाना जाता है